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जम्मू-कश्मीर में मोदी का मिशन 44+ फेल

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पिछले तीन महीने में हिना शफी भट्ट की जैसी चर्चा रही, वैसी सैय्यद मोहम्मद असलम बुखारी की नहीं रही। घाटी में वह भाजपा का मुस्लिम चेहरा थीं। अनुच्छेद 370 के मसले पर अपनी बेबाकी बयानों के कारण सुर्खियों में रहीं।
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मंगलवार को नतीजे सामने आए तो उनके रसूख की चिद्दियां उड़ गईं। अमीरा कदाल सीट पर पीडीपी के सैय्यद मोहम्मद असलम बुखारी 11,726 वोट पाकर जीत हासिल की थे। नेशनल कांफ्रेंस के नसीर असलम वानी 6,385 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि हिना के हिस्से मात्र 1,359 वोट ही आए।

घाटी में जैसे भाजपा उम्मीदवारों की उम्मीदों का गुब्बारा फूट रहा है, वैसे रियासत में पार्टी का मिशन 44+ भी मटियामेट हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में भाजपा के मिशन 44+ की हवा निकल गई है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच कश्मीर यात्राओं की बदौलत पार्टी 25 सीटें पाने में कामयाब रही है।
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अपने दम पर सरकार बनाने का सपना टूट गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर की सियासत में दखल जरूर बढ़ा है।

लोकसभा चुनावों में BJP ने तीन सीटें जीतीं थीं

16 मई की चिलचिलाती धूप से 23 दिसंबर की सर्द सुबह तक जम्मू-कश्मीर की स‌ियासत में सबसे जाना-पहचाना जुमला मिशन 44+ ही था। लोकसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर में रिकार्डतोड़ जीत के बाद भाजपा ने मिशन 44+ का सपना देखा था। बिलकुल लोकसभा चुनावों के मिशन 272+ की तर्ज पर।

लोकसभा चुनावों में भाजपा ने ‌रियासत में तीन सीटें जीतीं थी। शेष तीन सीटें पीडीपी ने जीती थी। पीडीपी ने घाटी की सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा ने जम्मू और लद्दाख इलाके की। भाजपा के मिशन 44+ की योजना लोकसभा चुनावों की उस जीत के बाद ही बनी था।

दरअसल जम्मू रीजन में विधान सभा की 37 सीटें आती हैं और लद्दाख में चार। भाजपा की योजना उन 41 सीटों पर क्लीन‌ स्विप की ‌थी। शेष सीटों का जुगाड़ घाटी से होना था।

घाटी में पीडीपी 29 सीटों पर आगे

घाटी में भाजपा ने 25 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था। वहां विधानसभा की 46 सीटें हीं। पार्टी का सबसे बड़ी दांव भी यही था। हालांकि यह दांव औंधे मुंह गिरा। घाटी में भाजपा खाता भी नहीं खोल पाई है।

खित्ते की सभी 46 सीटों पर भाजपा का बोरिया बिस्तर बंध गया है। घाटी में पीडीपी 28 सीटों पर आगे है। नेशनल कांफ्रेंस 15 और कांग्रेस 12 सीटों पर आगे है।

लद्दाख रीजन में भी भाजपा खाता नहीं खोल पाई है। लद्दाख में कांग्रेस तीन सीट पर आगे है। एक सीट अन्य उम्‍मीदवार पास है। जम्मू रीजन में भाजपा जरूर एक बड़ी ताकत के रूप में उभरी है। क्षेत्र की 37 सीटों में भाजपा 25 पर आगे चल रही है।

वैसे मिशन 44+ को सफल बानने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कम मेहनत नहीं की थी।
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फिर भी रंग लाई मोदी की मेहनत

मोदी ने विधानसभा चुनावों की अधिसूचना जारी होने के बाद कश्मीर की पांच यात्राएं की थीं। पांच दौरों में उन्होंने सात रैलियां की। अपने भाषणों में उन्होंने उमर अब्दुल्ला की सरकार से लेकर पीडीपी तक पर हमला बोला था।

वंशवाद की राजनीति को लेकर उन्होंने जितना अब्दुल्‍ला परिवार को कोसा, उतनी ही भर्त्सना मुफ्ती मोहम्मद सईद की भी की थी। चुनावों के अतिरिक्त उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कश्मीर के कई दौरे किए। अपने सभी दौरों में उन्होंने राज्य सरकार पर हमला बोला।

हालांकि जैसे रुझान है उन्हें देखकर नहीं लगता कि कश्मीर में मोदी को अधिक तवज्जो दी। कम से कम मिशन 44+ की असफलता तो यही कहती है।
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