अफगान राजधानी में दिसंबर की कड़कड़ाती सर्दी में यही कोई दोपहर का वक्त। पश्चिमी काबुल में बहने वाली एक नदी पर बने पुल से कुछ लोग कतार लगाकर नीचे की ओर देख रहे हैं। थोड़ी देर बाद कुछ लोग वहां से चले जाते हैं तो उनकी जगह कोई नया राहगीर आकर नीचे की ओर ताकने लगता है।
दिन कोई भी हो, लेकिन हर दोपहर यहां ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है। दरअसल ये लोग पुल के नीचे अफीम का सेवन करने वाले लोगों को देखने हैं। उनकी दशा पर तरस खाते हैं और फिर दो-चार शब्द बोलकर चले जाते हैं। हालांकि, पुल के नीचे हेरोइन और अफीम का सेवन करने वाले नशेड़ियों की सेहत पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
(फोटो साभार- pri.org)
दम तोड़ चुके हैं कई नशेड़ी
ये लोग इसी तरह से धुंवा उड़ाते या इंजेक्शन के जरिए हेरोइन का सेवन करते पाए जाते हैं। इन नशेड़ियों में कुछ बेहद कमजोर हो चुके हैं तो कुछ मरने की हालत में पहुंच गए हैं। एक स्थानीय निवासी और पुल से अक्सर इन नशाखोरों को ताकने वाले 30 वर्षीय अली जुमा यहां कई नशेड़ियों को दम तोड़ते भी देख चुके हैं।
जब उनसे पूछा गया कि वह यहां क्या देखते हैं तो वह तपाक से कहते हैं, ‘हम इन नशेड़ियों हस्र देखने आते हैं।’ कई बार लोग यहां खड़े होते ही अपनी नाक दबा लेते हैं, उन्हें डर होता है कि कहीं होरोइन का धुंआ नाक में पहुंचने के बाद उन्हें भी इसकी लत न लग जाए।
अपने हाथों बर्बाद कर रहे जिंदगी
अपने हाथों बर्बाद कर रहे जिंदगी
एक ऑफ ड्यूटी सोल्जर हमीदुल्ला (27) कहते हैं, ‘ये लोग अपनी जिंदगी को अपने हाथों बर्बाद कर रहे हैं।’ स्थानीय लोगों को इस बात से भी खीज है कि सरकार इस नशाखोरी को काबू करने के लिए कुछ करती नहीं। हालांकि, सरकार ने नशाखोरी की लत छुड़ाने की योजना शुरू की है, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। जानकार देश में बड़े पैमाने पर होने वाली अफीम की खेती को इसका मुख्य कारण मानते हैं।
भयावह हकीकत
अफगानिस्तान में नशाखोरी की लत दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। अशिक्षा, गरीबी और दशकों से यद्ध में फंसे इस देश में करीब 2.7 फीसदी वयस्क हेरोइन और अफीम के नशे की चपेट में है। यह औसत ईरान और रूस जैसे नशाखोरी के लिए बदनाम देशों के बराबर ही है। संख्या में बात करें तो यहां करीब 13 से 16 लाख लोग नशे की जद में है, जो अफगानिस्तान की आबादी का करीब पांच फीसदी है।