कश्मीर में अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई के मुद्दे पर एक नए खुलासे के बाद इस पर विवाद गहराता जा रहा है।
आ रही खबरों के मुताबिक मसर्रत की रिहाई पर फैसला मुफ्ती सरकार में नहीं बल्कि उससे पहले राष्ट्रपति शासन के दौरान लिया गया था। ये प्रक्रिया फरवरी में ही शुरू हो गई थी। इस मामले पर जम्मू-कश्मीर गृह मंत्रालय की ओर से चिट्ठी भी लिखी गई थी।
अब इस नए खुलासे के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर गृह मंत्रालय से चिट्ठी पर सफाई मांगी है। ये चिट्ठी जम्मू कश्मीर गृह मंत्रालय ने 4 फरवरी को लिखी थी। वहीं ये पूरा विवाद एक बार फिर संसद में उठा।
एक दिन पहले लोकसभा में मसर्रत मुद्दे पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की सफाई के बाद नए खुलासे के बाद एक मंगलवार को राज्यसभा में लगातार दूसरे दिन भी हंगामा हुआ।
विपक्ष ने पूरे मामले पर सरकार से जवाब मांगा है। विपक्ष ने पूछा, "क्या मुफ्ती सरकार बनने से पहले ही तय हो गई थी मसर्रत की रिहाई।"