मदरसों को गैर स्कूल घोषित करने और इनमें पढ़ने वालों को स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों में शामिल करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर सियासत गरमा गई है।
महाराष्ट्र सरकार का हालांकि दावा है कि इससे मदरसा केबच्चों को मुख्य धारा की शिक्षा में लाने में मदद मिलेगी, मगर अल्पसंख्यक संगठन इसे मुसलमानों के खिलाफ साजिश करार दिया है।
अल्पसंख्यक संगठनों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने मदरसों को गैरस्कूल घोषित करना अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। विवाद बढ़ने पर इस मामले में केंद्र सरकार ने भी सफाई दी।
नकवी ने दी सफाई, ओवैसी ने खड़े किए सवाल
अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह फैसला मदरसों की राष्ट्रभक्ति पर संदेह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
मोदी सरकार अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा में लाने मदरसों की स्थिति मजबूत करने केलिए हर तरह की मदद देगी। एआईएमआईएम के मुखिया और सांसद असादुद्दीन ओवैसी ने प्रदेश सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि गैरस्कूलों की सूची में महज मदरसे ही क्यों आए।
मुख्यधारा की शिक्षा से इतर चल रहे अन्य धर्मों के शिक्षा संस्थानों को भी गैरस्कूल घोषित क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा हासिल करना अल्पसंख्यकों का मौलिक अधिकार है।
मौलिक अधिकारों का उल्लंघन?
यह फैसला सीधे सीधे अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन जस्टिस एमएसए सिद्दीकी ने भी इस फैसले को संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
हालांकि उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से मदरसों के अस्तित्व पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि न तो सरकारें मदरसों की मदद करती हैं और न ही मदरसों में पढ़ने वालों को सरकारी नौकरियों का लाभ ही मिलता है।
इसके बावजूद यह फैसला मौलिक अधिकार देने वाले संविधान की धारा 30 पर हमला करती है। इस मुद्दे पर विवाद बढ़ जाने के बाद सरकार की ओर से नकवी ने सफाई दी।
अपना वादा निभायेगी मोदी सरकार
उन्होंने कहा कि इस फैसले का सीधा सा अर्थ है कि सरकार मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा उपलब्ध कराना चाहती है।
उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान मदरसों को शिक्षा के अधिकार कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
उन्होंने इस फैसले को मदरसों और इनमें पढ़ने वाले बच्चों की राष्ट्रभक्ति पर संदेह के रूप में न देखने की नसीहत दी। साथ ही दावा किया कि मोदी सरकार अपने वादे के मुताबिक मुसलमानों की बेहतरी के लिए न केवल इन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ेगी, बल्कि मदरसों को भी मदद देगी।