सीरिया में जारी गृह युद्ध के कारण वहां से भागने वाले लोगों का सिलसिला जारी है। इन लोगों का कहना है कि उन्हें एक तरफ़ राष्ट्रपति बशर-अल-असद की सेना तो दूसरी तरफ़ इस्लामिक स्टेट के हमलों से ख़तरा है और इसलिए वो अपना सब कुछ दांव पर लगाकर सीरिया छोड़ रहे हैं।
इस्लामिक स्टेट का गढ़ कहे जाने वाले रक़्क़ा से भागने वाला एक परिवार अभी तुर्की और सीरिया के पास रह रहा है, बीबीसी संवाददाता मार्क लोवेन की मुलाकात इस परिवार से हुई।
परिवार के एक सदस्य ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि इस्लामिक स्टेट के राज में आम लोगों की ज़िंदगी किस तरह की है।
चुस्त पैंट पहनने पर भेज देते हैं जेल
लगभग बीस दिन पहले अपने परिवार के साथ रक़्क़ा से भागकर आने वाले इस व्यक्ति ने बताया, "रक़्क़ा में बिजली नहीं है, पानी बहुत कम है और कोई रोज़गार भी नहीं है। अगर आप चुस्त पैंट पहनते हैं, लंबे बाल रखते हैं या फिर धूम्रपान करते हैं तो आपको 15 दिन की जेल हो सकती है।
अगर नमाज़ के वक्त घर से बाहर हैं तो आपको गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।" इस व्यक्ति ने बताया, "महिला और छोटे बच्चे बाहर नहीं जा सकते हैं। इस्लामिक स्टेट हमें जिहाद में शामिल होने के लिए मजबूर करता है, हम सैकड़ों डॉलर देकर वहां से बाहर निकले हैं।"
जब पूछा गया कि क्या इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर पश्चिमी देशों के हमलों से कोई फ़र्क पड़ रहा है, तो इस व्यक्ति ने बताया, "ये हमले कामयाब है, इनमें कई ऐसे ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा हैं जहां आईएस के बहुत सारे लड़ाके रहते हैं।
हवाई हमलों के बीच रहना बहुत भयानक
आईएस डरा हुआ है और लोगों को अपने संगठन में भर्ती होने के लिए पैसे दे रहा है।" "लेकिन हवाई हमलों के बीच रहना बहुत भयानक होता है, बच्चे रात को सो नहीं सकते हैं, घर कांपते हैं।"
हवाई हमलों के अभियान में ब्रिटेन के शामिल होने पर इस व्यक्ति ने कहा, "जो भी आईएस को निशाना बना रहा है, वो ठीक कर रहा है।
लेकिन हम इन हमलों में मारे जाने वाले आम नागरिकों के लिए चिंतित हैं, रक़्क़ा में हमारे रिश्तेदार रहते हैं। हम तो बस यही उम्मीद करते हैं कि आईएस को हरा दिया जाए।"