आम चुनाव के नतीजे के साथ ही केंद्र की राजनीति में बड़ा बदलाव दिख रहा है। केंद्र की राजनीति करने वाले नेता नेतृत्व के मामले में हाशिए पर जा रहे हैं तो कई नेता राज्यों में अपने करिश्माई नेतृत्व के सहारे केंद्र की राजनीति के सिरमौर बन रहे हैं।
राज्य की राजनीति के सहारे देश की सत्ता के शिखर पर पहुंचे नरेंद्र मोदी के बाद अब अमित शाह की भाजपा अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी केंद्रीय राजनीति के इस बदलते चरित्र का साफ संदेश दे रही है।
मोदी-शाह के इतर भी राज्यों के कई क्षत्रप मसलन जयललिता, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक की केंद्रीय राजनीति में बढ़ी धमक भी इसी ओर इशारा कर रही है।
मोदी ने जहां गुजरात का मुख्यमंत्री रहते अपनी देशव्यापी छवि बनाई, वहीं बीते साल तक केंद्र की राजनीति के लिए अनजान से शख्स अमित शाह पहले गुजरात और फिर उत्तर प्रदेश में अपनी संगठन क्षमता का परिचय देकर अचानक केंद्रीय राजनीति में छा गए।
लगातार मजबूत हो रहे हैं क्षेत्रीय सूरमा
मोदी-शाह के इतर भाजपा में भी राज्यों की राजनीति के बदौलत ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा के मुख्यमंत्रियों शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह और मनोहर परिक्कर की राष्ट्रीय स्तर पर छवि बनी है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सबसे करारी हार की एक बड़ी वजह राज्यों में करिश्माई नेतृत्व की घनघोर कमी को माना जा रहा है।
सत्ता और संगठन में भाजपा के राज्यों की राजनीति से आए चेहरों के कमान संभालने और केंद्रीय राजनीति की घनघोर नुमाइंदगी करने वाली कांग्रेस की राजनीतिक दुर्दशा से साफ है कि राष्ट्रीय राजनीति के दिग्गज चेहरे अब केंद्र की राजनीति में कमजोर पड़ रहे हैं।
अब इनकी जगह क्षेत्रीय सूरमा अपनी जगह लगातार मजबूत करते दिख रहे हैं। केंद्रीय राजनीति में अचानक चमके राज्यों के इन सितारों को भविष्य में राज्यों की राजनीति करने वालों से ही चुनौती मिलती दिखाई दे रही है।
कांग्रेस को भी याद आए राज्यों के दिग्गज
आम चुनाव में अपने दम पर भाजपा को सत्ता दिलाने और केंद्र की सत्ता का बागडोर संभालने वाले मोदी और अब भाजपा की कमान संभालने वाले शाह राज्य की राजनीति की ही उपज हैं।
बतौर मुख्यमंत्री मोदी ने राज्य की राजनीति से ही राष्ट्रीय राजनीति से अपनी ही पार्टी के कई सूरमाओं को पीछे छोड़ते हुए प्रधानमंत्री बनने का करिश्मा दिखाया तो शाह भी राज्य में काम करने के लिए मिले मौकों को भुना कर दूसरी पीढ़ी के नेताओं को किनारे करते हुए पार्टी के सिरमौर बने।
महज मोदी और शाह ही नहीं भाजपा में केंद्र की राजनीति करने वाली दूसरी पीढ़ी के नेताओं की जगह भरने की लिए तैयार हो रही नई टीम में ज्यादातर नेता राज्यों की राजनीति करने वाले हैं।
इस कड़ी में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, डॉ हर्षवर्धन, राधामोहन सिंह, सर्वानंद सोनावाल, मनोज सिन्हा, संजीव बालियान, किरण रिजिजू, सदानंद गौड़ा, श्रीपद नाइक, जितेंद्र सिंह जैसे कई नेता शामिल हैं।
सबसे करारी हार के बाद कांग्रेस में भी अब राज्यों की राजनीति करने वालों को महत्व मिलता दिख रहा है। मसलन कर्नाटक की राजनीति से पहचान बनाने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे को संसदीय दल का नेता तो पंजाब की राजनीति करते रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह को उपनेता बनाया गया है।