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लालू के गांव में शोक, लेकिन उम्मीद बाकी

Fri, 04 Oct 2013 12:45 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में पांच साल की सजा मिलने के बाद लालू और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के गांव में शोक छाया हुआ है। लालू के जेल जाने से गांव के लोग सकते में हैं।
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लालू यादव के गांव फुलवारिया और राबड़ी देवी के गांव सलारकेला में लोगों के लिए विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि वह जेल जा चुके हैं।

फुलवारिया गांव के मदन राय बताते हैं कि यह फैसला गांववालों के लिए अनपेक्षित है। कइयों ने फैसले के दिन बृहस्पतिवार की रात खाना नहीं खाया था, ताकि वो इस मुश्किल घड़ी में लालू के साथ खड़े दिखें।

एक अन्य गांव वाले रमेश यादव का कहना है कि गांववाले लालू के बिना अपनी जिंदगी को लेकर चिंता में है और अब उच्च न्यायालय से उम्मीद लगाए बैठे हैं।

ससुराल वालों के लिए निर्दोष हैं लालू
लालू यादव के ही गांव में रहने वाले सनोज राय लालू पर गर्व करते हुए कहते हैं कि उन्होंने यहां सड़कें बनाईं, बिजली लाए, पोस्ट ऑफिस, बैंक, अस्पताल, स्कूल और रेलवे स्टेशन बनवाए। यहां लालू यादव के घर पर सभी लोग सोमवार से इकट्ठे हो रहे हैं।
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वहीं, फुलवारिया से चार किमी दूर राबड़ी देवी के गांव वालों के लिए इस फैसले को अपनाना ही मुश्किल हो रहा है। उनका मानना है कि इस गांव का दामाद निर्दोष है। लालू यादव ने साल 2008 में अपने और राबड़ी देवी के गांव को रेलवे लिंक से जोड़ा था।

अब भी रास्ता बाकी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार अब लालू यादव के चुनाव लड़ने पर 11 साल तक प्रतिबंध लगने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन फिर भी उनके पास उम्मीद बाकी है।

लालू यादव अब भी चुनाव लड़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के 10 जुलाई के निर्णय के मुताबिक अगर ऊपरी अदालत दोषी के अपराध और सजा पर रोक लगा देती है तो वह चुनाव लड़ सकता है। हालांक यह दुर्लभ परिस्थितियों में ही किया जाना संभव है।
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