सीरिया और इराक के बाद कट्टरपंथी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट अब भारत और पाकिस्तान में भी पांव पसारता नजर आ रहा है।
बीते दिनों भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में आईएस के पर्चे और झंडे दिखाई दिए, जिससे पता चलता है कि तालिबान और अल कायदा के गढ़ में भी यह संगठन आतंकियों को प्रभावित कर रहा है।
पाकिस्तान तालिबान से अलग हुआ एक गुट जमात-उल-अहरार पहले ही इस संगठन को अपना समर्थन देने की घोषणा कर चुका है।
संगठन के सरगना और तालिबान का प्रमुख चेहरा एहसानुल्ला एहसान ने रायटर्स से कहा, "हम उनका सम्मान करते हैं। अगर वे हमसे मदद के लिए कहेंगे तो हम इस पर देखकर कोई फैसला लेंगे।"
वैसे तो दक्षिण एशिया में कई इस्लामिक संगठन का पहले से ही प्रभाव रहा है, लेकिन लोगों के सिर कलम करने वाले और व्यापक नरसंहार करने वाले इस्लामिक स्टेट ने इस इलाके के युवा लड़ाकों का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू किया है।
इस्लामिक स्टेट का बढ़ता प्रभाव
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर प्रभाव रखने वाले अल कायदा के उम्र दराज कमांडर अब कट्टर जेहादी सोशल मीडिया के मंच पर बड़ी तेजी के साथ निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं, जबकि नए आतंकी रंगरूटों की भर्ती के लिए यही मंच का काम करते हैं।
सुरक्षा जानकारों के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट के बढ़ते प्रभाव ने ही अल कायदा सरगना अल जवाहिरी को भारत में अपने संगठन की शाखा खोलने की घोषणा करने के लिए मजबूर किया।
भारत के शीर्ष आईबी अधिकारी के मुताबिक, "हमारे साथ दिक्कत यह है कि हमें इस संगठन के नेटवर्क और इसके लिए काम करने वालों के बारे में बहुत कुछ पता नहीं है। हम कई आतंकी संगठनों की जानकारी निकालने में सक्षम हैं, लेकिन यहां तो युवा सोशल मीडिया के जरिए घर बैठे ही कट्टरपंथी बनते जा रहे हैं।"
आईएस की पाक में गतिविधि
अपना प्रभाव जमाने के लिए आईएस पाक अफगान सीमा पर पेशावर और पूर्वी अफगानिस्तान में पिछले कुछ सप्ताह से पर्चे बांट रहा है।
12 पेज के इस बुकलेट को फतह (जीत) नाम दिया गया है। इसे पश्तो और अफगानिस्तान की दारी भाषा में छापा गया है और इसे मुख्यत: पेशावर के बाहरी इलाके के अफगान शरणार्थी शिविरों में बांटा जा रहा है।
पाक सुरक्षाकर्मियों, कई आतंकी संगठनों और स्थानीय लोगों ने इन पर्चों के बांटे जाने की पुष्टि भी की है।
उधर भारत में भी आईएस के उभार के निशान दिखाई पड़ रहे हैं। गर्मियों में प्रदर्शन के दौरान कश्मीर के श्रीनगर में कुछ लोग आईएस का झंडा और बैनर लहराते नजर आए थे। फिलहाल स्थानीय पुलिस उनकी तलाश में है।
भारत में दिख रहे उभार के निशान
आईएस का झंडा पहली बार 27 जून को दिखाई पड़ा था और उसके बाद यह ईद के मौके पर भी देखा गया। आईएस के कुछ चित्र श्रीनगर की दिवारों पर भी देखे गए।
पुलिस का कहना है कि भारत विरोधी रैली करने और आईएस का झंडा लहराने वालों की पहचान हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
आईएस दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले भारत के मुसलमानों को अपने संघर्ष में शामिल करना चाहता है। हालांकि अल कायदा इस कोशिश में नाकाम रहा है।
अपनी इसी कोशिश के तहत आईएस ने मध्य जुलाई में हिंदी, तमिल और उर्दूं में एक वीडियो जारी कर भारत के मुसलमानों से ग्लोबल जेहाद में शामिल होने की अपील की थी।
यही नहीं मुंबई के चार युवा आईएस के साथ जुड़ भी चुके हैं। इसमें से एक की बम धमाके में मौत भी हो चुकी है।