आर्थिक सुधारों से जुड़े बिलों पर विपक्ष के विरोध का सामना कर रही मोदी सरकार को पहली सफलता हाथ लगी है। राज्य सभा ने इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने वाले बिल को पारित कर दिया है।
इसके तहत देश के इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ कर 49 फीसदी हो जाएगी। सरकार को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और कुछ अन्य पार्टियों के सहयोग की वजह से इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने से जुड़े बिल को पारित कराने में कामयाबी मिली।
राज्यसभा में विवादास्पद बीमा कानून (संशोधित), 2015 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। बिल का विरोध करने के लिए तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक ने बर्हिगमन का रास्ता अख्तियार किया। ध्वनिमत से पारित बिल पिछले साल दिसंबर में इस संबंध में लाए गए अध्यादेश की जगह लेगा।
कांग्रेस समेत कई अन्य दलों ने किया सहयोग
राज्यसभा में इस बिल पर सरकार की नैया पार कराने में अन्नाद्रमुक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), बीजू जनता दल, शिवसेना और अकाली दल ने अहम भूमिका निभाई।
बिल बृहस्पतिवार को शाम को पेश किया। इससे पहले बिल के प्रावधानों को लेकर सरकार और विपक्ष में जम कर बहस हुई और कुछ तकनीकी मुद्दों पर सदन को स्थगित भी करना पड़ा क्योंकि इसमें ऐसा ही एक विधेयक पहले से लंबित था।
बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने से संबंधित मूल बिल 2008 में कांग्रेस सरकार के वक्त लाया गया था। लेकिन राज्यसभा में बृहस्पतिवार को ढाई घंटे की बहस के बाद इस बिल को वापस लेकर नया बिल पारित कर दिया गया।
तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों ने किया विरोध
बिल का तृणमूल और वामपंथी दलों ने विरोध किया। तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा और जनता दल यूनाइटेड ने विरोध में बर्हिगमन किया। वामपंथी सदस्यों ने संशोधन प्रस्तावित किए लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया।
लोकसभा में बीमा संशोधन बिल 4 मार्च को पारित हो चुका है। इसमें बीमा सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा मौजूदा 26 फीसदी से बढ़ा कर 49 फीसदी करने का प्रावधान है।
देश में बीमा बाजार की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए बीमा सेक्टर में खासा विदेश निवेश की संभावना है।