नेपाल में सात प्रांतों के मॉडल वाले नए संविधान का विरोध कर रहे मधेसियों के मसले समेत मौजूदा हालातों पर चर्चा करने के लिए भारत ने अपने राजदूत को बुलाया है।
माना जा रहा है कि नए संविधान के मसले पर भारत अपनी सलाह नहीं माने जाने पर नेपाल से नाखुश है। वहीं, दूसरी ओर नेपाल में नए संविधान के मसले पर तराई के इलाकों में मधेसी और थारू समूहों का प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहा। इस बीच, नेपाल ने कहा है कि बहुजातीय देश में हरेक को खुश करना संभव नहीं है।
नेपाल के प्रमुख माओवादी नेता प्रचंड ने कहा कि नेपाल भारत का दोस्त तो है, मगर उसका ‘यसमैन’ नहीं। उन्होंने कहा कि नेपाल चीन और भारत दोनों से समान मित्रता रखना चाहता है।
राजदूत को बुलाया
नेपाल के मौजूदा हालातों और आगामी रणनीति पर चर्चा करने भारत के राजदूत रंजीत रे सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे। इससे पहले रे ने सीमावर्ती इलाकों में हिंसा और मधेसियों के हितों की अनदेखी किए जाने के मसले पर भारत की चिंताओं से नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को अवगत कराया था। रे मंगलवार को ही नेपाल वापस लौट जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने नेपाल से कहा था कि वह आपसी मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में हिंसामुक्त वातावरण बहाल हो सके।
भारत ने नए संविधान के ऐलान से पहले नेपाल से यह ताकीद भी की थी कि वह ऐसा संविधान लागू करे, जिसमें सबकी सहमति हो और जो सबको स्वीकार्य हो।
नेपाल ने कहा कि बहुजातीय देश में हरेक को खुश नहीं कर सकते
सूत्रों का कहना है कि नेपाल से अपने राजदूत को बुलाने का मकसद भारत को अपनी नाखुशी जताना है। खास बात यह है कि विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा है, ‘रविवार को संविधान के ऐलान होने के बाद से हम भारत से सटे सीमावर्ती नेपाल के इलाकों में हो रही हिंसा में लोगों के मरने और जख्मी होने से काफी चिंतित हैं।
हम एक बार फिर नेपाल के राजनीति नेतृत्व को सावधान करते हैं कि वह इन इलाकों में तनाव कम करने के लिए फौरन कदम उठाए। ऐसी घटनाओं से बचा जाना चाहिए।’ वहीं, भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने अपने पुराने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि संविधान के तहत हिंदुओं की भावनाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
हालांकि उन्होंने कहा कि बहुजातीय नेपाल में हरेक को खुश करना संभव नहीं है। सिर्फ तराई में आरक्षण का ही नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में भी कुछ मसलों पर विरोध है और नाखुशी है।