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अच्छे दिन के लिए महिलाएं कर रहीं दुआ

Thu, 29 May 2014 06:46 PM IST
कमल शर्मा/अमर उजाला, अलीगढ़
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नई सरकार के सत्तारूढ़ होते ही भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर जमी बर्फ एक बार फिर पिघलनी शुरू हो गई है।
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पाकिस्तान से रिश्तों की डोर में भले ही कई गांठें पड़ चुकी हों लेकिन अलीगढ़ की 35 महिलाएं आज भी इस डोर के अटूट होने की अल्लाह से दुआ कर रही हैं।

कारण यह है कि अगर दोनों देशों में संबंध बेहतर होंगे तो इन्हें अपनी ससुराल छोड़कर वापस पाकिस्तान नहीं जाना पड़ेगा।

दोनों देशों के रिश्ते सुधरने की आस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दिल्ली बुलाकर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।

दोनों देशों के बीच इन प्रयासों में किसी भी स्तर पर छलावा नहीं हुआ तो बेहतर संबंध होने के अलीगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में रह रहीं 356 महिलाएं आसानी से भारत की नागरिक हो जाएंगी।

ये वह पाक महिलाएं हैं जो ब्याह कर अलीगढ़ और यूपी के विभिन्न हिस्सों में रह रही हैं। लेकिन हर पल उन्हें भारत छोड़ने का डर भी सताता रहता है।

नागरिकता के लिए फरजाना कर रही 23 साल से इंतजार

हमदर्द नगर में शटरिंग का काम करने वाले मुसफ्फर अली खां की शादी सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर की रहने वाली फरजाना सईद से हुई। यह शादी भी इत्तफाक थी।

फरजाना अपनी अम्मी के साथ 1991 में अलीगढ़ आई थीं। मुसफ्फर और फरजाना दोनों के परिवार वाले शादी के लिए राजी हो गए। एक सप्ताह में शादी की रस्म भी पूरी हो गई।

1991 से लेकर अब तक 23 साल हो गए, लेकिन फरजाना को भारत की नागरिकता नहीं मिली है। करीब 18 साल तक प्रयास करने के बाद उनकी नागरिकता के लिए प्रदेश सरकार से फाइल केंद्रीय गृह मंत्रालय में पहुंच गई।

दिसंबर 2012 में वहां के अफसरों ने कह भी दिया कि एक-दो महीने में नागरिकता का सर्टिफिकेट मिल जाएगा। 19 दिसंबर 2012 को नागरिकता के सर्टिफिकेट के स्थान पर एक पत्र आया, जिसमें नागरिकता के प्रपत्रों में यह कह कर आपत्ति लगा दी गई कि वह नए सिरे से आवेदन करें। नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने के 12 महीने तक वह मूल नागरिकता वाले देश में नहीं जा सकेंगे।
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356 पाकिस्तानी महिलाएं हैं ससुराल में

फरजाना का कहना है कि 2007 में उसके पिता का इंतकाल हो गया था, उस वजह से सात दिन के लिए पाकिस्तान जाना पड़ गया था। इसी को नागरिकता के नियमों का उल्लंघन मानकर आवेदन निरस्त हो गया।

वह कहती हैं कि 23 साल के दौरान तीन बार 21 दिनों के लिए पाकिस्तान गईं थीं। इस समय वह लॉन्ग टर्म वीजा पर अलीगढ़ में अपने पति के साथ रह रहीं हैं। जिसे हर तीन साल के बाद बढ़वाना पड़ रहा है।

अब नए सिरे से नागरिकता के लिए आवेदन को जिले के प्रशासनिक अधिकारी नहीं भेज रहे हैं। इस तरह का दर्द अकेली फरजाना का नहीं बल्कि अलीगढ़ ससुराल में रह रहीं 35 पाकिस्तानी महिलाओं का है। इन सभी के आवेदन जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच लंबित पड़े हुए हैं।

दूसरी ओर इस मामले में एडीएम सिटी अवधेश तिवारी ने बताया, "नागरिकता के लिए आवेदन आए हैं। अधिकांश की जांच और औपचारिकताएं पूरी कर के प्रदेश सरकार ने इसे गृह मंत्रालय को भेज दिया है। नागरिकता के बारे में तो केंद्रीय गृह मंत्रालय को फैसला करना है।"
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