पिछले महीने धनबाद की रैली में नृपेंद्र मिश्रा नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर दिखे थे। चुनावी सरगर्मी शबाब पर थी, इसलिए मोदी के बगल में खड़े 69 साल के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पर ध्यान भी न गया।
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वह मंच की भीड़ में वैसे ही लगे, जैसे भाजपा के कई अन्य नेता, कार्यकर्ता या समर्थक! लेकिन पिछले दो दिनों से नृपेंद्र मिश्रा चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ट्राई के पूर्व चेयरमैन प्रधान सचिव नियुक्त किया है।
नृपेंद्र की नियुक्ति आम नियुक्तियों जैसी भी नहीं रही। मिश्रा को नियुक्ति करने के लिए सरकार को अध्यादेश के जरिए नियमों में बदलाव करना पड़ा।
अध्यादेश लाकर की नियुक्ति
महज तीन दिन पुरानी सरकार का पहला अध्यादेश विवादों में आ गया। एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी को महज नई नियुक्ति देने के लिए अध्यादेश लाने का संभवतः ये पहला उदाहरण भी था।
अध्यादेश के जरिए मिश्रा की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया। पार्टी ने कहा कि यह वही भाजपा है, जिसने लाखों लोगों को फायदा पहुंचाने वाले खाद्य सुरक्षा बिल पर अध्यादेश का विरोध किया था।
कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने कहा कि सांसदों ने अभी शपथ नहीं ली। स्पीकर की नियुक्ति नहीं हुई। ऐसे में प्रधानमंत्री का प्रधान सचिव नियुक्त करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है?
ट्राई के पूर्व अध्यक्ष थे नृपेंद्र मिश्रा
ऐसी क्या बात थी ट्राई के पूर्व अध्यक्ष की नई नियुक्ति के लिए मोदी को ऐसा फैसला करना पड़ा। ट्राई कानून के मुताबिक चेयरमैन या सदस्य रह चुका व्यक्ति पद छोड़ने के बाद कोई सरकारी पद नहीं ले सकता है। वह पद छोड़ने के दो साल बाद तक कोई व्यावसायिक पद भी नहीं ले सकता।
नए नियम के मुताबिक, ट्राई से चेयरमैन या सदस्य पद से रिटायर हुआ व्यक्ति केंद्र सरकार की मंजूरी के बगैर किसी भी सरकार या टेलीकॉम क्षेत्र की किसी कंपनी में कोई पद स्वीकार नहीं कर सकता।
नृपेंद्र मिश्रा में ऐसी क्या बात है कि मोदी उन पर मेहरबान हो उठे। आइए, जानते खंगालते हैं अपने नए प्रधान सचिव के अब तक की उपलब्धियों का लेखाजोखा।
यूपी कैडर, 1967 बैच के आईएएस अधिकारी
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई के पूर्व अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के 1967 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
प्रधान सचिव के रूप में मिश्रा का कार्यकाल प्रधानमंत्री के कार्यकाल के साथ या अगले आदेश के बाद खत्म होगा। 69 वर्षीय मिश्रा वर्ष 2009 में ट्राई के अध्यक्ष पर से रिटायर हुए थे।
आईएएस अधिकारी के रूप में वे कई सरकारों में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। मिश्रा के बारे में मशहूर है कि वे अपने लक्ष्यों को रिकार्ड समय में पा लेते हैं और उत्कृष्टता के मामले में भी उनका कोई सानी नहीं है।
मोदी सरकार में बने प्रधान सचिव
प्रधान सचिव के रूप में मोदी सरकार के हर काम-काज पर मिश्रा की नजर होगी। 90 के दशक में उत्तर प्रदेश में भाजपा की पहली सरकार यानी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के कार्यकाल में वे भी वे प्रधान सचिव थे।
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नृपेंद्र मिश्रा ने सिंगल विंडो सिस्टम का सुझाव दिया था। प्रशासनिक सुधारों में कल्याण की भी रुचि थी, नृपेंद्र के प्रस्ताव से वे बहुत प्रभावित हुए थे।
हालांकि, उन दिनों संघ मिश्रा की कार्यशैली से बहुत नाराज रहता था। संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य' में मिश्रा के खिलाफ एक आलेख भी छपा था, जिसमें उन्हें अमेरिका का करीबी बताया गया था।
कल्याण सरकार में अहम पद
उन दिनों पांचजन्य के संपादक भानु प्रताप शुक्ला थे, जिन्हें दिग्गज भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी का सहयोगी माना जाता था। ऐसा माना जाता है कि शुक्ला के जरिए जोशी ने नृपेंद्र के खिलाफ दुष्प्रचार किया था, ताकि कल्याण सिंह की सरकार को अस्थिर किया जा सके।
कल्याण उन आलोचनाओं से परेशान नहीं हुए थे। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कल्याण पर दबाव बनाकर नृपेंद्र को हटवा दिया था। नृपेंद्र को उसके बाद ग्रेटर नोएडा का चेयरमैन बनाया गया था।
दिल्ली में नृपेंद्र ने वाणिज्य, रसायन और दूरसंचार मंत्रालयों में काम किया। दूरसंचार सचिव पद पर रहते हुए ही वे रिटायर हुए थे। बाद में उन्हें ट्राई का अध्यक्ष बनाया गया।
मिश्रा के कार्यकाल में ही 2जी लाइसेंसों का बंटवारा हुआ था, जिसमें कैग ने 1.76 लाख करोड़ घोटाले का आरोप लगाया। 2जी घोटाले में मिश्रा गवाह के रूप में भी पेश हुए थे।