‘तोता, मैना, शेर, केला, आम, पपीता और अमरूद...’ ये तथाकथित टोकन कोड हैं, जो ट्रकों के लिए बाकायदा उनकी तस्वीर के साथ जारी किए गए हैं। इन फोटोयुक्त टोकन के अलग-अलग दाम हैं और उस आधार पर सहूलियतें भी अलग-अलग। ये टोकन दिखाकर सैकड़ों ट्रक आसानी से रोजाना बनारस की सीमा पार करते हैं।
कभी उनके रजिस्ट्रेशन या परमिट के कागजात की चेकिंग नहीं होती। टोकन के इस खेल में हर महीने पांच करोड़ रुपये के राजस्व की चपत लग रही है। शनिवार को एसपी ट्रैफिक डॉ. बीएन तिवारी ने यह मामला उजागर किया।
बताया कि ट्रैफिक विभाग और आरटीओ की मिलीभगत से प्रतिमाह पांच करोड़ रुपये की हानि सरकारी राजस्व को पहुंचाई जा रही है। जल्द ही समूचे मामले का बड़े पैमाने पर खुलासा करेंगे, उससे पहले मंडलायुक्त को पूरे मामले की रिपोर्ट सौंपी जाएगी।