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भर्ती परीक्षाओं में बढ़ा हिन्दी, संस्कृत का क्रेज

Sun, 30 Nov 2014 11:39 AM IST
अविनाशी श्रीवास्तव/अमर उजाला, इलाहाबाद
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संघ लोक सेवा आयोग तथा राज्य लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में हिन्दी के बढ़ते प्रभाव का असर यूजीसी-नेट पर भी है। दिसंबर में होने वाली यूजीसी की इस परीक्षा में हिन्दी के साथ संस्कृत भी हॉट सब्जेक्ट के रूप में सामने आया है।
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तुलनात्मक रूप से कहें तो बीते दो वर्षों में ही दोनों विषयों में अभ्यर्थियों की संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ गई है। आवेदकों की संख्या के लिहाज से हिन्दी ने इतिहास को न सिर्फ पीछे छोड़ दिया बल्कि पहले पायदान पर भी है। वहीं संस्कृत के आवेदकों की संख्या भी दो हजार पार कर गई है।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी तथा लोअर सबऑर्डिनेट भर्ती परीक्षा में तो हिन्दी का ही पेपर निर्णायक हो गया। इसका असर यूजीसी नेट पर साफ दीखता है।
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इलाहाबाद सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा

दिसंबर-2012 में होने वाली राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के लिए कुल 28,824 आवेदकों में से सबसे अधिक 5995 आवेदक प्राचीन इतिहास के थे। हिन्दी विषय से नेट के लिए 4461 आवेदन हुए थे। वहीं दिसंबर-2013 में हुए कुल 26378 आवेदनों में से सबसे अधिक 4680 आवेदक हिन्दी विषय के थे। इतिहास के अभ्यर्थियों की संख्या 4524 रही। इस बार हिन्दी का यह आंकड़ा भी कहीं पीछे छूट गया है। कुल 32884 आवेदनों में से हिन्दी के आवेदकों की संख्या 6599 है।

आवेदकों की संख्या 5183 के साथ इतिहास दूसरे स्थान पर है। यही स्थिति संस्कृत को लेकर भी है। दिसंबर-2012 में आवेदकों की संख्या 1500 से अधिक और अगले वर्ष 1800 से अधिक हुई। अबकी यह आंकड़ा 2190 पहुंच गया है। अन्य विषयों से तुलनात्मक रूप से संस्कृत पांचवें स्थान पर है। बीएड शिक्षकों की बढ़ती मांग को देखते हुए शिक्षाशास्त्र विषय से नेट आवेदकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। हिन्दी और इतिहास के बाद शिक्षाशास्त्र तीसरे स्थान पर है। दिसंबर-2012 में 2800 तथा इसके अगले वर्ष तीन हजार से अधिक आवेदक थे। अबकी यह संख्या 3543 तक पहुंच गई।

‘बीते वर्षों की तुलना में हिन्दी के आवेदकों की संख्या लगातार बढ़ी है। आवेदकों की दृष्टि से इलाहाबाद देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर भी उभरा है।’
प्रोफेसर एके श्रीवास्तव
समन्वयक, यूजीसी नेट, इलाहाबाद विश्वविद्यालय
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