वृंदावन में पश्चिम बंगाल और बिहार से विधवाओं के न आने देने को लेकर दिए गए अपने बयान को भाजपा सांसद अभिनेत्री हेमा मालिनी ने जायज ठहराया है।
हेमा ने कहा कि उनके बयान के पीछे मकसद यह था कि कैसे पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में वहां की सरकारें विधवाओं की अनदेखी कर रही हैं।
65 वर्षीय अभिनेत्री और मथुरा से सांसद ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा जिसका उन्हें अफसोस हो।
मालूम हो कि अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान हेमा ने कहा था कि वृंदावन एक पवित्र शहर है, यहां हजारों बेसहारा महिलाएं रहती हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों की विधवाओं को यहां आकर भीड़ नहीं बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने कहा था कि वृंदावन में पहले से ही 35 हजार विधवाएं हैं, यहां उनके लिए और जगह नहीं है।
हेमा मालिनी ने एक के बाद एक ट्वीट कर बयान का बचाव करते हुए कहा कि मीडिया को दिये गए वास्तविक साक्षात्कार को किसी नहीं नहीं सुना।
उन्होंने कहा, "यह देखना दर्दनाक है कि गरीब विधवाएं सड़कों पर अपनी जीविका चलाने के लिए भीख मांगती हैं। क्या आप सभी ने कभी भी उनकी दुर्दशा महसूस की है। मेरा लक्ष्य उनको इस अवस्था से बाहर निकालना है लेकिन यह समझना होगा कि वृंदावन में भी स्थान सीमित है।"