तमिलनाडु में हिंदी को बढ़ावा देने की कोशिश का विरोध जारी रखते हुए राज्य की जयललिता सरकार ने दो विश्वविद्यालयों को यूजीसी के एक निर्देश को मानने से रोक दिया है।
यूजीसी ने राज्य के अन्ना विश्वविद्यालय और अलागप्पा विश्वविद्यालय को भेजे सर्कुलर में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में हिंदी को अंग्रेजी के साथ प्राथमिक भाषा के रूप में पढ़ाने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार ने हिंदी थोपने की कोशिश शुरू की थी। उसका यह फैसला बाध्यकारी नहीं है।
पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा कि दोनों विश्वविद्यालयों को 16 सितंबर 2014 को प्राप्त सर्कुलर में स्नातक स्तर पर कानून और वाणिज्य संकाय में भी हिंदी को प्राथमिक भाषा के रूप में पढ़ाने की बात कही गई है। इस बारे में 28 जुलाई 2011 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय हिंदी समिति की बैठक में फैसला लिया गया था।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है कि गैर हिंदी भाषी राज्यों पर हिंदी नहीं थोपी जा सकती। आधिकारिक भाषा कानून, 1963 में यह स्पष्ट है कि गैर हिंदी भाषी राज्यों के साथ आधिकारिक संवाद केवल अंग्रेजी में किया जाना चाहिए। हिंदी समिति का फैसला राज्य के छात्रों पर हिंदी थोपने जैसा है। ऐसे में यूजीसी का सर्कुलर तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों में लागू नहीं किया जाएगा।