फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तबाही का जायजा लेने पीएम-सोनिया गांधी उत्तराखंड रवाना

Wed, 19 Jun 2013 05:44 PM IST
इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड में मंगलवार को मौसम खुला तो आपदा के गहरे जख्म दिखने लगे। शनिवार से सोमवार तक आसमान से बरसी आफत के बाद रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक सैकड़ों लोग लापता हैं।
विज्ञापन


केदारनाथ में भारी तबाही, मंदिर के अलावा कुछ न बचा

केदारनाथ, रामबाड़ा, सोनप्रयाग, चंद्रापुरी, गौरीकुंड में भारी नुकसान हुआ है। कम से कम 131 लोगों की मौत हुई है। हालांकि प्रशासन ने मरने या लापता होने वालों के किसी आंकड़े की पुष्टि नहीं की है, लेकिन माना है कि व्यापक जनहानि हुई है।

तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत

जान-माल के नुकसान का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी आज यहां का दौरा कर रहे हैं।

मौसम साफ होने के बाद मंगलवार को राहत और बचाव के लिए पूरा तंत्र हरकत में आया। बचाव कार्य की कमान पूरी तरह सेना ने संभाल ली है।

केदारघाटी से अब तक बचाए गए लोगों की सूची

सैकड़ों फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हालांकि विभिन्न स्थानों पर करीब 61 हजार यात्रियों के अब भी फंसे होने का अनुमान है।

















भागीरथी, गंगा समेत अन्य उफनाई नदियों का जलस्तर घटने से भी आपदा से बेहाल लोगों को कुछ राहत मिली है।

उत्तराखंड में अब भी हालात बेकाबू, 73 मरे, हजारों फंसे

रविवार को उफनाई मंदाकिनी का पानी रामबाड़ा बाजार में घुस गया था। मंगलवार को हेलीकाप्टर से हवाई सर्वेक्षण में रामबाड़ा की जगह सिर्फ मलबा दिखाई दिया। रामबाड़ा में कम से कम सौ लोग लापता हैं।
विज्ञापन


रामबाड़ा केदारनाथ यात्रा मार्ग का पड़ाव है। आयुक्त गढ़वाल सुवर्द्धन ने कहा कि बुधवार को छोटे हेलीकाप्टर से यहां पहुंचने की कोशिश की जाएगी।

रुद्रप्रयाग जिले में अब तक 25 से 30 लोगों के शव निकाले गए हैं। केदारनाथ नेशनल हाईवे पर बसे सोनप्रयाग का बाजार पूरी तरह बह गया है।

तस्वीरों में देखिए केदारनाथ की तबाही

चंद्रापुरी में भी कई होटल और लॉज बह गए। तबाह हुए गौरीकुंड में फंसे लोगों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। यहां भी 250 दुकानें, लॉज, छोटे होटल बहने की आशंका है।

सोमवार सुबह गांधी सरोवर के फटने से केदारनाथ में भारी तबाही हुई है। यहां करीब 250 सरकारी-गैरसरकारी होटल-लॉज, दुकानें थी। अब हालत यह है कि चारों ओर मलबा पटा हुआ है।

'भोले शंकर' से नाराज है गंगा मैया!

क्षतिग्रस्त और ढहे भवन दिखाई दे रहे हैं। केदारनाथ मंदिर के चारों ओर पानी बह रहा है। मंदिर परिसर में भी भारी बोल्डर और मलबा जमा हो गया है।

मंदिर पूरी तरह सही-सलामत है। लेकिन परिसर के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। मंदिर का चढ़ावा भी बहने की आशंका है।

तस्वीरों में: उफान पर यमुना

केदारनाथ से लौटे एसडीएम राकेश तिवारी का कहना है कि मंदिर परिसर के आसपास 50 से ज्यादा शव पड़े हुए हैं। पुलिस के कई जवानों और सरकारी कर्मचारियों का कुछ पता नहीं है।

लापता और मरने वालों में स्थानीय लोगों के साथ बाहर के लोग भी हैं। बताया गया है कि रविवार को धाम में ढाई हजार लोग पहुंचे थे। लोग जगह-जगह टीलों पर फंसे हुए हैं।

सुरक्षित बचाए गए सैकड़ों लोग
मंगलवार को हेलीकॉप्टर की मदद से केदारनाथ से 850 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। 500 लोग अब भी फंसे हैं।

बिहार के पूर्व मंत्री अश्विनी कुमार चौबे को भी केदारनाथ से सुरक्षित निकालकर गुप्तकाशी ले जाया गया है। लेकिन इनके साथ आए कुछ लोग लापता बताए जा रहे हैं।

आईटीबीपी के जवानों ने चमोली जिले के गोविंदघाट, पांडुकेश्वर और लामबगड़ से दो हजार से भी अधिक तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालकर जोशीमठ पहुंचाया है।

देवप्रयाग-श्रीनगर मार्ग बंद होने से रास्ते में फंसे करीब 300 यात्रियों को देवप्रयाग-पौड़ी और पौड़ी-कोटद्वार मार्ग से गंतव्य तक पहुंचाया गया। उत्तरकाशी में भी यात्री फंसे हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।

कई लोग मलबे में दबे, बादल फटने से आठ की मौत

रुद्रप्रयाग में गौरीकुंड से तीन किमी पूर्व मुंडकटिया के ऊपर एक जगह कई लोग दो दिनों से फंसे हुए थे। मंगलवार को दोपहर बाद यहां भूस्खलन शुरू हो गया, जिसमें कुछ लोगों के मलबे में दबने की सूचना है।

चमोली जिले में 13 लोगों की मौत हुई है। इनमें से आठ की मौत बादल फटने से हुई। उत्तरकाशी जिले के उड़री गांव में तीन की मौत हो गई। एक लापता है।

वीरभद्र को सुरक्षित निकाला
भूस्खलन के बाद किन्नौर जिले में फंसे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को 60 घंटे बाद मंगलवार सुबह हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित वहां से बाहर निकाल लिया गया।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें