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मोदी सरकार की स्वामी पर केस चलाने की सिफारिश

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भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार अपने ही एक नेता की याचिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में उतर आई है। मोदी सरकार ने अपने ही नेता सुब्रमण्यन स्वामी के खिलाफ केस चलाने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी पर हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच नफरत फैलाने के आरोप में लगाए गए अभियोग को सही करार दिया है।
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 केंद्र ने वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की उस याचिका को रद्द करने की अपील की है जिसमें उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच घृणा और दुश्मनी की वजह बनने वाले भाषणों और लेखों पर लागू दंडात्मक प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है।

गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि आईपीसी की धारा 153ए की संवैधानिकता को बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का उल्लंघन बताकर चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया जाए क्योंकि यह धारा केवल उनको दंडित को कहता है जिनके कार्यों से विभिन्न वर्गों के बीच घृणा या दुश्मनी को बढ़ावा मिले या फिर विभिन्न वर्गों के बीच सद्भाव बनाए रखने का खतरा हो।
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स्‍वामी ने दी थी चुनौती

हलफनामे में भाजपा नेता द्वारा लिखी गई एक किताब का भी जिक्र किया गया है जिसमें उन्होंने भारत के समुदायों के खिलाफ भड़काऊ बातें कही हैं।

सुब्रह्मण्यम स्वामी अपने भड़काऊ भाषणों के चलते असम के करीमगंज में एक अदालती मामले का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इससे बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है। साथ ही उन्होंने आईपीसी की धारा 153ए की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी हुई है।

कानून के मुताबिक हेट स्पीच किसी भाषण, आचरण या व्यवहार, लेखन या चित्रण को कहा जाता है, जिससे हिंसा भड़क सकती है या धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं या विभिन्न समुदायों के बीच धर्म, जाति, जन्मस्थान, निवास या भाषा के आधार पर दुश्मनी हो सकती है। इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाया गया है।




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