भारत के निवासी अब भी यह समझने में लगे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बताए अच्छे दिन किसके होंगे। पहले बुलेट ट्रेन आएगी या फिर उनके घर में एक शौचालय होगा। पहले बड़े-बड़े उद्योगो की मशीनें चलेंगी या फिर बिजली से घरों में बल्ब।
लेकिन वहीं कुछ लोगों के लिए तो मोदी के सत्ता में आते ही दिवाली, ईद और होली की खुशियां एक साथ घर लौट आई हैं।
अमित शाह, मायाबेन कोडनानी, अभय चूड़ासमा, जीएल सिंघल, एके शर्मा वो लोग हैं जो कल तक बियाबां में थे लेकिन अब सत्ता के गलियारों में लौट आए हैं।
अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में किसी के सबसे ज़्यादा अच्छे दिन आए हैं तो वो हैं अमित शाह। इन पर हत्या में शामिल होने का केस चल रहा है। फिलहाल ये मामला अदालत में लंबित है और शाह जमानत पर रिहा हैं। मोदी ने इन्हें 2014 के चुनाव का 'मैन ऑफ़ दी मैच' बताया है और वे बीजेपी के अध्यक्ष बना दिए गए।
इशरत जहाँ और सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले की जांच करने वाले जिन दो अफ़सरों को इनमें कथित तौर पर अमित शाह के हाथ होने के सुराग मिले, उनका भारत सरकार ने हाल ही में गुजरात से बाहर तबादला कर दिया।
सतीश वर्मा जिन्होंने इशरत मामले की जांच की थी, उन्हें शिलांग में नार्थ ईस्टर्न पावर कारपोरेशन लिमिटेड भेज दिया गया। और रजनीश राय जिन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की जाँच की थी, उनका झारखण्ड के जादूगोड़ा तबादला कर दिया गया।
शाह के सितारे अब आसमान चूम रहे हैं और वे अपने बेटे के लिए सियासी पिच तैयार कर रहे हैं।