प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में गंगा प्रदूषण से कराह रही है। हाल ही में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के निदेशक टीवीएसएन प्रसाद ने नालों को बंद करने और एक बूंद भी गंदा पानी गंगा में न जाने देने की हिदायत दी थी लेकिन हकीकत कुछ और है।
अकेले घरेलू और औद्योगिक नालों से 40 करोड़ लीटर गंदा पानी प्रतिदिन गंगा में बहाया जा रहा है। मंदिरों से निकलने वाली करीब आठ कुंतल फूलमाला तो किनारों पर सड़ती ही है, श्मशान घाटों की राख और शव भी धड़ल्ले से गंगा में बहाए जा रहे हैं। अगर इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी निर्मलीकरण का सपना अधूरा रह जाएगा।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद से अब तक गंगा को निर्मल बनाने के लिए मंत्रियों, अफसरों के दौरे के अलावा कुछ भी सतह पर नहीं आ सका है। अलबत्ता अफसरों के निर्देश को ठेंगा दिखाते हुए स्लाटर हाउस, साड़ी रंगाई के कारखानों के अलावा अन्य उद्योगों और घरेलू उपयोग के बाद निकलने वाले गंदा पानी को गंगा में धड़ल्ले से बहाया जा रहा है।