मैगी नूडल्स में तय मानक से ज्यादा मोनो सोडियम ग्लूटामेट और सीसा पाए जाने के बाद विवादों में फंसी नेस्ले ने अब इसे वापस लेने का ऐलान किया है। इससे पहले सात राज्यों में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
कंपनी के बयान में कहा गया है कि इसके उत्पाद सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन हाल की घटनाओं और बेवजह की चिंताओं की वजह से उपभोक्ताओं में मैगी नूडल्स को लेकर भ्रम पैदा हो गया। लिहाजा कंपनी ने इसे वापस लेने का फैसला किया है।
इससे पहले दिल्ली, उत्तराखंड, तमिलनाडु, गुजरात व जम्मू-कश्मीर, केरल और असम में इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। तमिलनाडु में मैगी पर तीन महीने की रोक लगाई गई। यह प्रतिबंध नूडल्स के तीन दूसरे ब्रांडों पर भी लगाया गया है। वहीं गुजरात और जम्मू-कश्मीर में मैगी पर फिलहाल एक महीने के लिए प्रतिबंध होगा।
आगे की कार्रवाई मैगी के नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी। सभी राज्यों ने नेस्ले से मैगी का सारा स्टॉक वापस लेने को कहा है।
उत्तराखंड में मैगी के उत्पादन पर भी रोक लगी
उत्तराखंड में मैगी पर लगाया गया प्रतिबंध 90 दिन तक लागू रहेगा। इस अवधि में मैगी का उत्पादन भी नहीं किया जा सकेगा। इस आदेश के बाद ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी डा. पंकज पांडेय ने पंतनगर स्थित नेस्ले फैक्ट्री को नोटिस भेजकर तत्काल प्रभाव से उत्पादन पर रोक लगा दी है।
वहीं हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने राज्य में मैगी के एकमात्र प्लांट में पहली बार दबिश दी। इस दौरान मैगी के तीन अलग-अलग बैच के सैंपल लिए गए। इन्हें जांच के लिए कंडाघाट लैब भेजा जाएगा।
असम सरकार ने भी मैगी के चिकन फ्लेवर पर तीस दिन के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। मैगी के अन्य उत्पादों पर भी रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मैगी पर प्रतिबंध लगाने के बारे में फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया है। राज्य का खाद्य सुरक्षा एवं ड्रग प्रशासन मैगी के सैंपलों की रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा कर रहा है।
तमिलनाडु ने मैगी और तीन अन्य उत्पादों पर रोक
उधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि राज्य के कई हिस्सों से जुटाए गए सैंपलों की जांच कोलकाता स्थित प्रयोगशाला में कराई जा रही है। कोई भी कार्रवाई सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी।
अरुणाचल प्रदेश, पुडुचेरी और राजस्थान में भी मैगी के नमूने परीक्षण के लिए एकत्रित किए गए हैं। राजस्थान के सैंपलों को जांच के लिए उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित एक प्रयोगशाला में भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट 15 दिन के भीतर मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने मैगी और तीन अन्य उत्पादों की बिक्री, उत्पादन और स्टोरेज पर तीन महीने की रोक लगा दी। राज्य में नेस्ले की मैगी के अलावा वेई वेई एक्सप्रेस नूडल्स, रिलायंस सलेक्ट इंस्टेंट नूडल्स, स्मिथ एंड जोंस चिकन मसाला नूडल्स में काफी मात्रा में लेड पाए जाने के बाद प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य सरकार ने इन सभी कंपनियों से बाजार से अपने स्टॉक हटाने को कहा है।
गुजरात ने मैगी, एसके फूड्स के नूडल्स पर रोक लगाई
गुजरात सरकार ने भी मैगी के अलावा इंस्टेंट नूडल्स की दो अन्य कंपनियों सनफीस्ट और एसके फूड्स के उत्पादों का टेस्ट कराया था। राज्य में एसके फूड्स के नूडल्स पर भी रोक लगा दी गई है। इसमें लेड (सीसे) की मात्रा तय अनुपात से ज्यादा पाई गई।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को राज्य में मैगी पर लगे प्रतिबंध को सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। इस बीच, वॉलमार्ट और मेट्रो एजी ने नेस्ले के मैगी नूडल्स को भारत में अपने होलसेल स्टोर्स से हटा लिया है।
वॉलमार्ट के प्रवक्ता के मुताबिक, ‘मैगी को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच खाद्य सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व देते हुए हमने अपने 20 बेस्ट प्राइस मॉर्डन होलसेल स्टोर्स पर मैगी की बिक्री रोक दी है।
एफएसएसएआई और दूसरे राज्यों की खाद्य सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट आ जाने तक मैगी की बिक्री नहीं की जाएगी।’ उधर, मेट्रो एजी के जर्मनी स्थित मुख्यालय के मुताबिक, भारत में उसने अपने 18 कैश एंड कैरी स्टोर से मैगी को हटा लिया है। उधर, नेपाल भी भारत से आयात की गई मैगी के सैंपलों की जांच करवा रहा है।
गुजरात सरकार यिप्पी की भी जांच कराने की तैयारी में
गुजरात सरकार एक और लोकप्रिय नूडल्स ‘यिप्पी’ के सैंपलों की विस्तार से परीक्षण कराने की तैयारी में है। शुरुआती परीक्षण में इसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाया गया है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने बताया कि ‘गुजरात खाद्य एवं ड्रग नियंत्रण प्रसाशन ने विभिन्न हिस्सों से मैगी के 27 सैंपल जुटाए थे। इसके अलावा एसके फूड्स और सनफीस्ट के भी एक-एक सैंपल लिए गए थे। परीक्षण से पता चला है कि 27 नमूनों में से 14 में लेड की मात्रा 2.8 से 5 पीपीएम (पार्टिकल पर मिलियन) पाई गई। यह निर्धारित सीमा 2.5 पीपीएम से अधिक है। एसके फूड्स के नूडल्स में लेड की मात्रा 4 पीपीएम पाई गई है।
वहीं सनफीस्ट में लेड तो निर्धारित सीमा में है लेकिन इसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाया गया है। सनफीस्ट के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पहले कुछ और परीक्षण कराए जाएंगे।’ गौरतलब है कि एसके फूड्स का ब्रांड ‘लोएंग’ और आईटीसी सनफीस्ट का ब्रांड ‘यिप्पी’ है।
एफएसएसएआई ने कहा, दिल्ली, केरल की जांच ठीक
खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई ने बृहस्पतिवार को कहा कि नेस्ले के इंस्टेंट नूडल्स मैगी की खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सभी 29 राज्यों की टेस्ट रिपोर्टों का इंतजार करना जरूरी नहीं है। दिल्ली और केरल में की गई जांच के नतीजे पूरी तरह प्रामाणिक हैं।
नियामक ने गोवा, मध्य प्रदेश और पंजाब से फिर से मैगी के सैंपलों की जांच कराने को कहा है। इन राज्यों में मैगी के सैंपल सही पाए गए थे।
एफएसएसएआई के चेयरमैन युद्धवीर सिंह मलिक ने कहा कि दिल्ली और केरल में किए गए परीक्षण के नतीजे पूरी तरह प्रामाणिक पाए गए और राज्यों ने इसी के आधार पर कार्रवाई की है।
नड्डा बोले, मैगी पर फैसला जांच रिपोर्ट के आने के बाद
मैगी की गुणवत्ता पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को कहा कि सभी राज्यों से सैंपल की जांच रिपोर्ट मंगाई गई है। प्रदेश से रिपोर्ट आने के बाद मंत्रालय स्तर पर कोई फैसला लिया जाएगा।
नड्डा ने कहा कि पहली बार ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। इससे पहले भी खाद्य पदार्थों के सैंपल फेल पाए जाते रहे हैं, लेकिन जिस तथ्य को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसे देखने की जरूरत है। केंद्र सरकार इस पर गंभीर है। इसे चेक कराया जा रहा है। प्रदेशों से जब तक पूरे तथ्य सामने नहीं आ जाते, तब तक कोई बड़ा फैसला लेना या कार्रवाई करना संभव नहीं होगा। वैसे सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर दी गई है। रिपोर्ट से पहले मंत्रालय की ओर से कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।
केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि यदि इस नूडल्स के नमूने खाने के लिहाज से असुरक्षित पाए गए तो उत्पाद और इसका विज्ञापन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12 (1) (डी) और एफएसएसएआई द्वारा धारा 53 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।