पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के साथ 2005 में भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु करार की घोषणा से एक रात पूर्व अपनी टीम से इसे रोक देने को कहा था।
उन्होंने अमेरिका द्वारा पेश घातक प्रस्ताव के बाद यह निर्णय किया था। अमेरिका ने भारत के सिर्फ दो परमाणु रिएक्टरों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के दायरे के बाहर रखने का प्रस्ताव किया था। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने सोमवार को इस बात का खुलासा किया।
पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस की ओर एक सम्मेलन के दौरान इस संबंध में कही गई बात के बाद नारायणन ने यह खुलासा किया।
राइस ने कहा था कि मनमोहन सिंह ने भारत में विपक्षी दलों के विरोध के चलते 18 जुलाई 2005 को परमाणु करार की घोषणा से एक दिन पहले की रात को इसे रोक देने को कहा था।
नारायणन ने कहा कि यह ठीक है कि मनमोहन सिंह ने 17/18 जुलाई के बीच की रात को समझौते को वापस लेने को कहा था। किंतु इसके मुनासिब कारण थे।