उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार में खेलकूद मंत्री रहे अयोध्या प्रसाद पाल की संपत्तियों की जांच के लिए शनिवार से फतेहपुर जिले में विजिलेंस टीम डेरा डाले हुए है। टीम ने रविवार को बड़ा गोरखधंधा पकड़ा।
इलाहाबाद से जांच के लिए पहुंची टीम ने तहसीलदार का दफ्तर खुलवा कर दस्तावेजों की जांच की तो पता चला कि खागा स्थित हाईवे से जुड़ी सुजरही गांव की जिस जमीन को छह लाख रुपये में खरीदने का दावा किया गया था, उस जमीन की वास्तविक कीमत 20 करोड़ रुपये से ऊपर है।
इतना ही नहीं जिस व्यक्ति से इस जमीन को खरीदा गया है उसे पता ही नहीं कि उसकी जमीन बिक चुकी है। रविवार को विजिलेंस टीम के निरीक्षकों ने सदर तहसील खुलवा कर पूर्व मंत्री अयोध्या पाल द्वारा की गई खरीद-फरोख्त की जांच की।
इसके बाद टीम डीएसओ दफ्तर पहुंची लेकिन रविवार होने के कारण कोई अधिकारी दफ्तर में नहीं था। विजिलेंस निरीक्षकों ने बताया कि छानबीन के दौरान सुजरही गांव में विवादित जमीन के मालिक इंद्रपाल से बात हुई।
उसने बताया कि उसे पता ही नहीं कि उसकी जमीन बिक चुकी है लेकिन विजलेंस को प्राप्त इकरारनामे के मुताबिक यह जमीन छह लाख में बिकी है। इसके बदले पूर्व मंत्री पांच लाख रुपए का भुगतान भी कर चुके हैं।
निरीक्षकों के मुताबिक कि इस जमीन की वास्तविक कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। एक लाख रुपए का भुगतान होना अभी भी बाकी है। फिलहाल इस प्रकरण पर जांच जारी है। सूत्रों के मुताबिक आपूर्ति दफ्तर से भी बड़े घोटाले के खुलासे के आसार हैं।