किसी के हाथ में नंगी तलवार, तो कोई पेट्रोल बम से लैस। हर किसी के सिर खून सवार था। न बच्चों का ख्याल था और न ही महिलाओं का। बलवाई घरों और धार्मिक स्थलों में घुसकर भी एक-दूसरे के पक्ष के लोगों को ढूंढ़ रहे थे।
खिर्वा जलालपुर में करीब डेढ़ घंटे तक ऐसे ही हालात रहे। पूरा गांव रंजिश की तपिश से जल रहा था। मौके पर पहुंची पुलिस भी बलवाइयों को रोक पाने में असहाय नजर आई।
खिर्वा गांव के प्रधान और उनकी पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से कटने को लेकर चल ही तनातनी ने बृहस्पतिवार सुबह ऐसा रूप लिया कि हर कोई दहशत में आ गया था।
नहीं दिखा कानून का खौफ
हुसैनी चौक से शुरू हुआ बवाल देखते ही देखते पूरे गांव में फैल गया। तलवार, तमंचे और पेट्रोल बम लेकर लोग ऐसी अराजकता मचा रहे थे, मानो कानून का कोई खौफ ही नहीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सरधना थाना पुलिस जब गांव में पहुंची, तो पुलिस के सामने भी बवाल चलता रहा। पुलिस भी बलवाइयों को रोक पाने में असहाय थी। हथियार और अवैध असलहों से लैस बलवाई एक-दूसरे के घरों में घुसकर तोड़फोड़ और लूटपाट कर रहे थे।
बाहर से फोर्स आने तक पुलिस तमाशबीन की भूमिका में ही खड़ी दिखाई दी। बाद में जब जिलेभर की फोर्स मौके पर पहुंची तब जाकर पुलिस ने बलवाइयों को खदेड़ने में हिम्मत जुटाई। इसके बाद बलवाई जंगल के रास्ते भाग खडे़ हुए।
लोग हुए घायल और जले वाहन
खिर्वा में हुए संघर्ष में गाजी पुत्र मंजर जैदी ने दूसरे पक्ष के बलवाईयों पर घर में घुसकर हमला करने और 53 हजार की नकदी लूटने का आरोप लगाया। बलवे में एक पक्ष से मोहम्मद शाहिद, अमजद, मूसा, जहूर व मसजिद के मौअज्जन याकूब समेत करीब एक दर्जन लोग घायल हुए।
इनमें से कई को पुलिस ने हिरासत में लिया है। वहीं, शाह अब्बास जैदी पक्ष से रहीस उर्फ मुन्नू पुत्र फतेह अब्बास की मौत हो गई। इस पक्ष से शाह अब्बास जैदी, वसीम, रजा मेहंदी, साहिल, रिहान, बाबू पुत्र वसीम और शहबाज आदि घायल हुए।
हर तरफ फैल गई दहशत
कई दुकानों और वाहनों में तोड़फोड़ के साथ ही प्रधान रजी मोहम्मद की स्कूटी में आग लगा दी। घायल बाबू और शहबाज को जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया।
बवाल के कारण खिर्वा गांव में ऐसी दहशत फैली कि लोग अपनी जान बचाने में जुट गए। अधिकांश लोगों ने अपने घरों के दरवाजे बंद कर महिलाओं और बच्चों को कैद कर लिया। बलवाइयों ने उनके घरों के दरवाजे खुलवाने की कोशिश की।
इस पर मकानों में बंद लोग, रोने-चिल्लाने लगे। आलम यह था कि बाद में जब पुलिस ने दरवाजे खुलवाने चाहे, तब भी लोग इनकार ही कर रहे थे। जब उनसे कहा गया कि हम पुलिसवाले हैं, घबराओ मत दरवाजे खोल लो, तब लोगों ने राहत की सांस ली।