बिहार के चुनावी जंग में महागठबंधन के सामाजिक गणित के आगे भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए की पूरी सियासी केमिस्ट्री फेल हो गई। अति पिछड़ी जातियों को समेटे रखने के साथ नीतीश-लालू के गठबंधन ने भाजपा के वोट बैंक माने जाने वाली उच्च जातियों के मतों में भी सेंधमारी की है।
बेगुसराय, जहानाबाद, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, गोपालगंज, छपरा और सीवान सरीखे जिलों में भाजपा की करारी पराजय यह दर्शाती है कि महागठबंधन की सोशल इंजीनियरिंग भारी पड़ी है। यही नहीं सूबे के मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओबीसी और पिछड़ी जाति से होने की अपील को भी खारिज किया है।