यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में अब अंग्रेजी के अंकों को ग्रेडिंग या मेरिट में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा सरकार वर्ष 2011 में सिविल सेवा परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को 2015 की परीक्षा में शामिल होने का एक और मौका देगी।
सी-सैट विवाद को खत्म करने की कोशिश में जुटी सरकार ने संसद में सोमवार को इस आशय की घोषणा की। लेकिन इस ऐलान के बाद भी विवाद थमने के आसार कम ही हैं क्योंकि हिंदीभाषी छात्र सी-सैट को पूरी तरह से खत्म करने की मांग पर कायम हैं।
सरकार की घोषणा के बाद संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने भी भारी हंगामा किया। इस बीच, यूपीएससी ने साफ कर दिया है कि सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा तय तिथि 24 अगस्त को ही होगी।
परीक्षा स्थगित करने कोई फैसला नहीं
सरकार के इस फैसले के बाद अब प्रारंभिक परीक्षा में 400 के बजाय 380 अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार होगी। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में सी-सैट और प्रश्न पत्रों के अनुवाद पर विवाद के बीच सरकार ने अंग्रेजी के 20 अंक को ग्रेडिंग या मेरिट में शामिल नहीं करने की घोषणा की है।
कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद के दोनों सदनों में दिए बयान में कहा कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न पत्र 2 में अंग्रेजी भाषा वाले अंकों को ग्रेडेशन और मेरिट में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है।
इसके साथ ही सिंह ने कहा कि वर्ष 2011 के उम्मीदवारों को वर्ष 2015 की परीक्षा में बैठने का एक और अवसर दिया जाना चाहिए। हालांकि सिंह के बयान के बाद भी संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ।
'फैसला छात्रों की प्रतिभा का अपमान'
सपा और कांग्रेस ने कहा कि मुख्य मांग सी-सैट को खत्म करने की थी, मगर सरकार ने इस पर ही चुप्पी साध ली है।
वहीं राज्यसभा में हिंदी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं को लाभ न मिलने के सवाल पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्य मुद्दा अंग्रेजी के अंकों का था, जब यह ग्रेडिंग और मेरिट में नहीं जुड़ेंगे तो इसका लाभ सभी भारतीय भाषाओं को मिलेगा। इस फैसले के बाद हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं के साथ भेदभाव खत्म हो गया है।
हालांकि यूपीए की सहयोगी एनसीपी और जेडीयू ने सरकार की घोषणा का स्वागत किया है। वहीं, प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से सिर्फ प्रारंभिक परीक्षा में ही राहत मिलेगी।
क्या है सी-सैट
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में 2011 से पहले दो पेपर होते थे, एक पेपर सामान्य अध्ययन का, और दूसरा चुने गए वैकल्पिक विषय का। मगर 2011 से वैकल्पिक विषय को हटाकर सी-सैट प्रणाली अपनाई गई।
सी-सैट (सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट) पैटर्न के तहत परीक्षा में 200-200 अंकों के दो वस्तुनिष्ठ पेपर होते हैं। इन्हें सी-सैट 1 और सी-सैट 2 के नाम से भी जाना जाता है।
इनमें से पहले पेपर में सामान्य अध्ययन के कुल 100 सवाल पूछे जाते हैं, जबकि दूसरे पेपर में कांप्रिहेंशन, संचार, निर्णयन, गणित और रीजनिंग इत्यादि के 80 सवाल होते हैं।
छात्रों की ये है मांग
सी-सैट को खत्म कर परीक्षा में पुराने पैटर्न को लागू किया जाए, ताकि हिंदीभाषी छात्रों को भी बराबरी का मौका मिल सके।
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की तारीख को 24 अगस्त से आगे बढ़ाया जाए।
सरकार ने क्या किया
सी-सैट में कोई खास बदलाव नहीं, परीक्षा इसी पैटर्न पर होगी लेकिन अब सी-सैट-2 पेपर में अंग्रेजी के 20 नंबर मेरिट में नहीं जोड़े जाएंगे 2011 में परीक्षा देने वाले छात्रों को 2015 में एक और मौका दिया जाएगा।
फैसले के मायने
- सी-सैट की परीक्षा में अंग्रेजी कांप्रिहेंशन के तकरीबन 8 सवाल पूछे जाते हैं, जो 2.5-2.5 अंक के होते हैं। मगर छात्रों की असल परेशानी तो कांप्रिहेंशन के वे 26 सवाल थे, जिनके गूगल से किए अनुवाद को समझने में उनके पसीने छूट जाते हैं। इन पर सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।
- नए प्रावधान से तमिल, तेलुगू आदि गैर-हिंदीभाषी उम्मीदवारों को नुकसान होगा। साथ ही इससे अंग्रेजी भाषी छात्रों में भी असंतुष्टि फैलेगी।
- सरकार का फैसला आने में देरी और प्रारंभिक परीक्षा की तारीख आगे न बढ़ने का खामियाजा उन छात्रों को उठाना पड़ेगा, जो सी-सैट के विरोध में अपने आंदोलन के चलते अब तक पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाए।
- सरकार ने पूरे मुद्दे को हिंदी बनाम अंग्रेजी का बना दिया। जबकि हिंदीभाषियों की मांग महज इतनी थी, कि सी-सैट के नाम पर उनके साथ जो अन्याय हो रहा है, वह खत्म हो।
वरना इसकी क्या वजह थी कि यूपीएससी ने 2013 की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन के पेपर के लिए न्यूनतम क्वालीफाइंग अंक 200 में से 30, जबकि सी-सैट वाले पेपर में 200 में से 70 निर्धारित किए।