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खाली हाथ लौटे डोभाल, म्यांमार का टका सा जवाब

Fri, 19 Jun 2015 02:58 PM IST
गुंजन कुमार/अमर उजाला, दिल्ली।
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म्यांमार की सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि वे धन और बल से इतनी सक्षम नहीं कि गहरे जंगल में घुसकर भारत विरोधी उग्रवादी कैंपों को काबू में रख सके।
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म्यांमार ने भारत के खिलाफ फिर से बंदूक उठाने वाले उग्रवादी संगठन नेशनल सोसलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड के खापलांग के खिलाफ सघन कार्रवाई में साफ शब्दों में अपनी असमर्थता जाहिर कर दी है।

भारत के साथ 14 साल पुरानी वार्ता संधि तोड़ने वाले इस संगठन के साथ म्यांमार सरकार का शांति समझौता है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव एस जयशंकर की म्यांमार यात्रा के दौरान वहां की सरकार ने इन्हीं आधारों पर साझा सैन्य कार्रवाई को लेकर अपनी लाचारी जताई है।
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कार्रवाई की तैयारी के लिए गए थे डोभाल

डोभाल और जयशंकर के साथ पीएमओ के संयुक्त सचिव जावेद अशरफ भी थे। मणिपुर में 4 जून को सेना के काफिले पर हुए हमले के बाद भारत ने 9 तारीख को म्यांमार में एक सैन्य कार्रवाई की। काफिले पर हमले की जिम्मेदारी एनएससीएन-के ने ली थी।

जंगल के भीतर म्यांमार एजेंसियों के साथ साझा कार्रवाई की तैयारी के सिलसिले में डोभाल और जयशंकर बुधवार सुबह म्यांमार गए थे। सूत्रों के मुताबिक म्यांमार एजेंसियों ने बताया है कि भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद उग्रवादी अपने कैंप छोड़कर जंगलों में बिखर गए हैं।

दरअसल भारतीय एजेंसियां म्यांमार के जंगल के भीतर तागा स्थित एनएससीएन-के के मुख्यालय को ध्वस्त करना चाहती है। यह कैंप म्यांमार सीमा से करीब 70 किलोमीटर अंदर है। जबकि दोनों देशों के बीच हुए करार के मुताबिक सेना 10 किलोमीटर भीतर जा कर ही सैन्य कार्रवाई कर सकती है।
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खाली हाथ वापस आए डोभाल

डोभाल और जयशंकर बुधवार देर रात वापस आ गए हैं। इन्होंने म्यांमार में करीब 25 भारत विरोधी संगठनों की जानकारी दी है। सूत्रों के मुताबिक दोभाल और जयशंकर ने वहां के राष्ट्रपति थीन सीन और सेना प्रमुख जनरल मिन आंग ह्रलांग सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की।

भारतीय अधिकारियों ने इन्हें भरोसा दिलाया है कि अगर वह साझा कार्रवाई में शामिल होते हैं तो उनकी दूसरे तरीके से पूरी मदद की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि 9 जून की कार्रवाई के बाद भारतीय मीडिया में इस ऑपरेशन के महिमामंडन से उपजी गलतफहमी पर भी बातचीत हुर्द है।

गौरतलब है कि उस ऑपरेशन के बाद म्यांमार ने आधिकारिक तौर पर अपनी सीमा में भारतीय सेना के प्रवेश की खबर से इनकार कर दिया था।
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