फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...वो वादे जो उड़ा सकते हैं केजरीवाल की नींद

Mon, 13 Jan 2014 08:01 AM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
आम आदमी पार्टी ने फ्री पानी, बिजली के आधे दाम का वादा थोड़ा सही, लेकिन पूरा किया। अब अनुबंधित कर्मचारियों की पक्की नौकरी का वादा पूरा करना है।
विज्ञापन


जो आंकड़े अनुबंधित कर्मचारियों को मिले हैं, वह चौंकाने वाले हैं। दिल्ली में 556 नियोक्ता के पास 1839 कांट्रैक्टर के 1.02 लाख अनुबंधित कर्मी कार्यरत हैं।

मसलन इतने ही परिवार को एक साथ राहत मिल सकती है। वहीं तमाम ऐसे विभाग हैं जहां कर्मचारियों की भारी कमी है। स्वीकृति पदों के मुकाबले एक चौथाई पद ही भरे हुए हैं।
विज्ञापन


कांट्रैक्टर लाइसेंस का नवीनीकरण
आल इंडिया जनरल मजदूर ट्रेड यूनियन ने स्थायी स्वभाव वाले कार्यों के लिए कांट्रैक्टर को लाइसेंस दिये जाने का मामला श्रम मंत्री गिरीश सोनी से मुलाकात करके उठाया है। मंत्री को 1018 कांट्रैक्टर के लाइसेंस की प्रति भी सौंपी है।

श्रम मंत्री गिरीश सोनी ने श्रम विभाग को निर्देश दिए हैं कि कांट्रैक्टर को दिये गए लाइसेंस की जांच करें। नियम के विरुद्ध बने कांट्रैक्टर लाइसेंस का नवीनीकरण रोका जाए।

आल इंडिया जनरल मजदूर ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष प्रमोद कुमार राजपूत के अनुसार दिल्ली के सरकारी विभागों के अलावा प्राइवेट अस्पताल, मॉल में भी अनुबंधित कर्मचारी हैं। जबकि नियमत: स्थायी स्वभाव के काम के लिए अनुबंधित कर्मचारी नहीं रखे जाने चाहिए।

वह बताते हैं कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर्स, नर्स, अर्दली, पैरामेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मी तो शिक्षा विभाग में भविष्य की नींव तैयार करने वाले शिक्षक, डीटीसी में चालक और कंडक्टर बड़ी तादाद में अनुबंध पर काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सभी को नियमित करने का जो वादा किया है उसे पूरा करने के लिए गैर कानून बने कांट्रैक्टर लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकना होगा।

हर विभाग में में सविंदाकर्मी
सरकारी विभागों की बात करें तो सबसे अधिक 40728 कर्मी दक्षिण दिल्ली में अनुबंध पर कार्यरत हैं। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में 12358 कर्मी, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में 10061 कर्मी अनुबंध पर हैं। सबसे कम अनुबंधित कर्मी पूर्वी दिल्ली में करीब 4900 हैं।

दिल्ली सरकार के कई विभागों से जुड़े अधिकारियों ने बातचीत में बताया कि दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के पास ही दिल्ली सरकार के विभागों में भर्ती का अधिकार है।
विज्ञापन


उसमें बहुत लेटलतीफी होती है। यही वजह है कि पद खाली पड़े हैं। शिक्षा विभाग व डीटीसी में स्थायी नियुक्ति में देरी के कारण अनुबंध पर शिक्षक व चालक लगाए गए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें