भारत के चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर का मानना है कि आपराधिक मामलों में न्याय मिलने में होने वाली देरी बड़ी समस्या है। प्रक्रिया को पूरे होने में कभी-कभी 15-16 साल तक लग जाते हैं। जस्टिस पीडी देसाई मेमोरियल लेक्चर में जस्टिस कबीर ने इस विषय पर अपनी राय रखते हुए कहा, ‘वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या न्याय मिलने में लगने वाला समय है। मुकदमा दर्ज होने से लेकर सजा सुनाने में 15 से 16 साल लग जाते हैं। उम्मीद है कि जो लोग भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं, वह अपने काम में तेजी लाएंगे ताकि जल्द न्याय हो सके।’
आपराधिक मामलों में न्याय दिलाने की प्रशासनिक प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि देरी एक ऐसी समस्या है, जो न्यायपालिका को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है और कई बार अत्यधिक देरी होने से हमें आम जनता का गुस्सा झेलना पड़ता है।
दिल्ली गैंगरेप मामले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘पिछले साल 16 दिसंबर को दिल्ली में जो घटना घटी, उसके बाद हम सभी की पहली राय यही थी कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध से निबटने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट होने चाहिए। 2 जनवरी को नई दिल्ली के एक जिले में फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत हुई। इसके बाद हमें सुनने को मिला कि एक मामले में नौ दिनों और अन्य मामले में महज 13 दिनों में ट्रायल पूरा हो गया।’
जस्टिस कबीर ने कहा कि इस तरह की खबरों के बाद लोगों ने अपनी राय देना शुरू कर दिया। मगर हमें सिस्टम को दोष देने से पहले यह समझना चाहिए कि वर्तमान में हमारे देश की आबादी कितनी है। जनसंख्या पर प्रति जज की औसत में हम कहां ठहरते हैं। अमेरिका में हर 10 लाख लोगों पर 125 जज हैं और भारत में सिर्फ छह। यही हमारे देश की सच्चाई है।