इसे नरेंद मोदी की लहर कहें या कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा? मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ तो वोट दिया ही, विधानसभा चुनावों में भी देश अधिकांश हिस्सों में उसे नकार दिया गया।
ओडिशा में नवीन पटनायक ने चौथी बार जीत दर्ज की। आंध्र प्रदेश में टीडीपी पहले स्थान पर रही, वाईएसआर कांग्रेस दूसरे और टीआरएस तीसरे स्थान पर रही और सिक्किम में एसडीएफ की सरकार बनेगी।
मात्र अरुणाचल ही ऐसी जगह रही, जहां कांग्रेस अपना सम्मान बचाने में कामयाब रही। आंध्र प्रदेश में कांग्रेस से नाराजगी ऐसी थी कि लोगों ने मुर्दे को चुनाव में जीत दिला दी।
आंध्र में मुर्दे ने भी जीत लिया चुनाव
दरअसल वाकया आंध्र प्रदेश की अलगड्डा सीट का है। अलगड्डा सीट से वाईएसआर कांग्रेस की प्रत्याशी भूमा शोभा नागी रेड्डी की मतदान से दो सप्ताह पहले सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।
शुक्रवार को जब नतीजों की घोषणा की गई तो वे 180000 वोटों से चुनाव जीतने में कामयाब रही थी। जिसके बाद चुनाव आयोग ने उस सीट पर उप चुनाव कराने का फैसला किया।
अलगड्डा पर दूसरे नंबर पर तेलुगूदेसम पार्टी के जी प्रभाकर रेड्डी रहे।
वाईएसआर के महत्वपूर्ण नेताओं में थीं शोभा
46 वर्षीय शोभा रेड्डी सीमांध्रा में वाईएसआर कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक थीं। 24 अप्रैल को कार दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
वाईएसआर कांग्रेस को आंध्रा में मान्यता प्राप्त पार्टी का दर्जा नहीं प्राप्त है। इसलिए वहां चुनाव नहीं रद्द किया गया।
शोभा रेड्डी का नाम बैलट पेपर में शामिल किया जा चुका था, इसलिए चुनाव आयोग ने फैसला किया यदि शोभा चुनाव जीतती हैं तो उपचुनाव काराया जाएगा।
आंध्र में वाईएसआर कांग्रेस ने 75 सीटें हासिल की
उस समय आयोग के ही कई अधिकारियों ने तर्क दिया था कि शोभ के मिले वोटों को नोटा में गिन लिया जाएगा। हालांकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि शोभा चुनाव जीतने में कामयाब रहेंगी।
आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस ने 75 सीटें हासिल की हैं।