कहते हैं दुनिया की हर लड़ाई के पीछे जर, जोरू या जमीन वजह होती है। ये बात तब बिल्कुल सही साबित होती नजर आती है जब ईथोपिया में रहने वाले सूरमा जाति को आप देखते हैं।
यहां पर किसी भी मर्द को अपने जीवनसाथी को पाने के लिए पहले लड़ाई करनी होती है। ये जंग बहुत भयंकर होती है और इसमें जान जाने का भी खतरा होता है।
इस जाति के पुरूषों को लड़ाई में लगे घाव और गहरे चोटों को दिखाने की कोई आजादी नहीं है।
नाम है डोंगा फाइट
इस खूनी जंग में पुरूषों को मोटे और पैनीले लोहे के भालों से लड़ना होता है। ये पैनीला हिस्सा लकड़ी के डंडे के आगे की तरफ लगा रहता है।
इस भाले से लड़ते वक्त पुरूषों को कई भारी जख्म आ जाते हैं और वो ऐसे चोट होते हैं जो न सिर्फ भरने में बहुत लंबा वक्त लेते हैं बल्कि उनके निशान जिंदगी भर के लिए पीठ पर रह जाते हैं।
इस तरह से लड़ने और विपक्षी को हराने के बाद ही कोई भी मर्द औरत पर अपना दांव रख सकता है।
मर भी जाते हैं
इस डोंगा नाम की जंग में अक्सर मर्द मर भी जाया करते हैं। ऐसे पुरूषों को मुआवजे के तौर पर लड़की के परिवार वाले कम से कम 20 गाए देते हैं।
लेकिन भीड़ में से जो भी मर्द इस लड़ाई में विजेता बनता है वो गांव का हीरो कहलाता है और सभी औरतों में से उसे अपनी मनपंसद औरत चुनने का हक मिल जाता है।
निशान खूबसूरती की दूसरा नाम
इस जाति के लोगों की एक खास बात ये भी है कि वो अपने आप को सजाने के लिए चूने या फिर चावल के घोल से अपने शरीर पर कई डिजाइन बनवाते हैं।
ये उन्हें और भी खूबसूरत दिखाने में मददगार होता है। ऐसा ज्यादातर मर्द ही करते हैं।
यहां महिलाओं को है कितने ही पुरुषों से संबध बनाने की आजादी!