मामला महाराष्ट्र के उल्हासनगर का है। यहां बाल विद्यालय में सह अध्यापक अनन्त सवाले की तबियत खराब होने के बावजूद उसे पोल ड्यूटी से छट्टी नहीं मिली। पोल ड्यूटी कर रहे सहकर्मी ने भी प्रशासन से अनन्त की तबियत खराब होने की बात कही और उसे घर भेजने को कहा। लेकिन प्रशासन ने बात नहीं सुनी।
बेटी से कराई पोल ड्यूटी
अनन्त की तबियत ज्यादा खराब हुई और उन्हें अस्पताल भेजना पड़ा। लेकिन तब भी अधिकारियों ने उनके बजाय उनकी 15 साल की बेटी से पोल ड्यूटी कराई। पिता की तबियत खराब देखकर मजबूरन बेटी पोल ड्यूटी करने के लिए तैयार हो गई।
बेटी ड्यूटी पर, पिता की निकली जान
अनन्त के परिजनों ने बताया कि उन्हें मजबूरन अपनी 15 साल की बेटी ज्योति को अनन्त के बदले ड्यूटी पर भेजना पड़ा। इसके बाद ही अनन्त को अस्पताल भेजा गया।
एक तरफ 15 साल की लड़की पूरे दिन दिन पोल ड्यूटी पर तैनात रही और दूसरी तरफ अस्पताल में अनन्त की तबियत बिगड़ती गई और उन्हें बचाया नहीं जा सका। देर शाम जब बेटी ड्यूटी पूरी करके घर पहुंची तो उसे पिता की मौत की खबर मिली।
इतनी अमानवीयता आखिर क्यों
ज्योति ने बताया कि काफी दिन से उसके पिता की तबियत खराब थी। पोलिंग से एक दिन पहले वो चुनाव अधिकारी के पास गई और पिता की ड्यूटी न लगाने की अपील की। लेकिन अधिकारी ने कहा कि छुट्टी नहीं मिलेगी। वो चाहे तो पिता के साथ खड़ी रह सकती है।
अनन्त के साथियो को भी उनकी मौत का पता ड्यूटी पूरी करने के बाद ही चला। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी की तबियत की फिक्र नहीं करता। उसे बस पोल ड्यूटी से मतलब है। कर्मियों की सेहत और अन्य चिंताओँ को नजंरदाज करना अमानवीयता है।