देश भले ही 21वीं सदी के आधुनिक युग में पहुंच गया हो। पर अभी भी देश में जातिवाद के नाम पर एक जाति के लोग दूसरी जाति के लोगों के साथ भेदभाव बंद नहीं कर रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक पेशे से टैक्सी ड्राइवर 40 वर्षीय कल्लोर बाबू पंचावाद्यम में से एक एलाथलम बजाते हैं। पिछले 15 सालों से मंदिर के बाहर दूसरे हिंदू समुदाय के लोगों के साथ वह एलाथलम बजाता था। मंदिर के अंदर अपनी प्रस्तुति देने के लिए अन्य हिंदू वर्ग के साथियों ने उसे प्रेरित किया था।
पांच जनवरी को हुए इस मामले के बाद इलाके के लोगों में रोष है। कल्लोर बाबू का कहना है कि अगर मंदिर के पुजारी दलित वर्ग के लोगों से पैसा ले सकते हैं। पर मंदिर के अंदर एलाथलम बजाने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दे सकते हैं।
इस मुद्दे पर डिप्टी एडमिनिस्ट्रशन विजय नंबियार ने कहा कि मंदिर का पुराने रिवाज है कि यहां पर मरार समुदाय से जुड़े लोग ही है। एलाथलम को बजाते हैं।
गुरूव्यूर मंदिर अफेयर्स बोर्ड के चेयरमैन टीवी चंद्रमोहन ने बताया कि दलित कलाकार के मंदिर में अपने कार्यक्रम की प्रस्तुति पर रोक लगाए जाने का शिकयती पत्र हमें प्राप्त हुआ है। इस पर 21 जनवरी को होने वाली गुरूव्यूर मंदिर की बोर्ड की मीटिंग में फैसला लिया जाएगा।