पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में विधानसभा में हुए विधानसभा चुनावों के मतों की गिणती जारी है। त्रिपुरा में अभी तक आए रुझानों और नतीजों में वाम दल एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार में आती दिख रही है। 60 सदस्यों की विधानसभा में वाम दल 46 पर बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस 4 सीट पर आगे है। वहीं सीपीआई और अन्य एक-एक सीट पर आगे है। मुख्यमंत्री माणिक सरकार समेत उनके अधिकतर मंत्री आगे चल रहे हैं।
उधर मेघालय में सत्ताधारी कांग्रेस का परचम लहराता दिख रहा है। मेघालय में कांग्रेस 25 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। जबकि यूनाइटेड डेमोक्रटिक पार्टी (यूडीपी) 4 स्थानों पर बढ़त बनाए हुए है।
नागालैंड में एनपीएफ 12 सीटों पर आगे है जबकि कांग्रेस दो सीट पर आगे है। बाकी दो सीटें अन्य को जाती दिख रही है। अब तक गणना में कांग्रेस मेघालय में मजबूती की ओर बढ़ रही है। इसके अलावा 7 राज्यों की नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के मतों की भी गिणती हो रही है।
नागालैंड और मेघालय में 23 फरवरी को चुनाव हुए थे। वहीं त्रिपुरा में 14 फरवरी वोटिंग कराए गए थे। त्रिपुरा में देश में सर्वाधिक रिकॉर्ड 93 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। मेघालय में 88 और नगालैंड में 83 प्रतिशत मतदान हुआ था।
इसके अलावा मिजोरम में चालफिल्ह, पंजाब में मोगा और उत्तर प्रदेश की भाटपार रानी सीट तथा पश्चिम बंगाल की नलहटी, इंगलिश बाजार और रेजीनगर सीटों पर उपचुनाव भी उसी दिन हुए थे। असम में अलगापुर, बिहार में कल्याणपुर (सुरक्षित) और महाराष्ट्र में चांदगढ सीट के लिये उपचुनाव 24 फरवरी को हुए थे।
मेघालय विधानसभा का कार्यकाल 10 मार्च को समाप्त हो रहा है, जबकि नागालैंड विधानसभा का कार्यकाल 18 मार्च और त्रिपुरा विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च को समाप्त होगा। इन तीनों राज्यों ही में विधानसभा की 60-60 सीटें हैं।
त्रिपुरा में सत्तारूढ वाम मोर्चा के सबसे बड़े घटक माकपा ने 55 सीटों पर, आरएसपी ने दो, भाकपा ने दो और फॉरवर्ड ब्लॉक ने एक सीट पर प्रत्याशी खडे किए थे। कांग्रेस 48 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उसके गठबंधन सहयोगी आईएनपीटी ने 11 सीटों पर और नेशनल कांफ्रेंस ऑफ त्रिपुरा ने एक सीट पर प्रत्याशी उतारे हैं।
राज्य विधानसभा की 60 सीटों में से 20 सीटें अनुसूचित जनजाति और 10 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 22 लाख 77 हजार 415 है।