हफ्ते भर से घूसकांड में घिरे रेल मंत्री पवन बंसल की छुट्टी हो गई है। वहीं कोलगेट जांच में सीबीआई रिपोर्ट की हेर-फेर में फंसे कानून मंत्री अश्वनी कुमार को भी कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
सरकार और कांग्रेस की हो रही फजीहत से पीछा छुड़ाने के लिए सोनिया गांधी के सीधे दखल के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बंसल और अश्वनी से इस्तीफा मांग लिया।
प्रधानमंत्री ने दोनों मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर राष्ट्रपति के पास भेज दिए हैं। शनिवार को सरकार इन इस्तीफों को लेकर बयान जारी करेगी।
'रेलवे घूसकांड में रेल मंत्री पवन बंसल भी शामिल'
इस्तीफे पर शुक्रवार को लगभग छह घंटे के हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद बंसल ने रात नौ बजे प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंपते हुए खुद ही इसकी पुष्टि भी कर दी। माना जा रहा है कि बंसल की जगह मल्लिकार्जुन खड़गे को रेल मंत्रालय मिल सकता है।
अभी बंसल इस्तीफा सौंप कर प्रधानमंत्री निवास से निकले भी नहीं थे कि कानून मंत्री अश्वनी कुमार भी अपना त्यागपत्र लेकर वहां पहुंच गए।
जानिए, पहले किस घोटाले में बंसल पर लगे थे आरोप
बंसल पर सीबीआई की गिरफ्त बढ़ने के बाद कांग्रेस आलाकमान मान रहा है कि उनके खिलाफ पाए गए सबूत प्रथम दृष्टया सही हैं। लिहाजा उनका बचाव करना बड़ी मुसीबत को गले लगाने जैसा है। इसलिए उन्हें हटाना ही मुनासिब समझा गया।
कैबिनेट में जल्द फेरबदल संभव
रेल मंत्री और कानून मंत्री के इस्तीफों के बाद अब संकेत हैं कि जल्द ही कैबिनेट में मामूली फेरबदल किया जा सकता है।
अगले रेल मंत्री की दौड़ में गुलाम नबी आजाद, सीपी जोशी और मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम चर्चा में है। आजाद ने प्रधानमंत्री से मुलाकात भी की है। जबकि अगले कानून मंत्री की दौड़ में कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी शामिल हैं।
क्या है मामला
पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला को 3 मई को रेलवे में प्रमोशन के लिए घूसखोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। सिंगला ने रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश कुमार को मेंबर इलेक्ट्रिकल बनवाने का यकीन दिलाया था। मामले में अब तक दस लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मामले में बंसल के शामिल होने के भी सीबीआई को पुख्ता संकेत मिल रहे हैं।
अश्वनी कुमार पर कोयला घोटाला मामले में सीबीआई की जांच स्टेटस रिपोर्ट बदलवाने का आरोप है। सीबीआई की जांच में दखल को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में कड़ी टिप्पणियां किए जाने के बाद से अश्वनी कुमार पर इस्तीफा देने का जबरदस्त दबाव था। सीबीआई ने हलफनामे में कहा था कि रिपोर्ट में कानून मंत्री, पीएमओ और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने बदलाव कराए।