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नेता विपक्ष के लिए कांग्रेस-एनसीपी आमने-सामने

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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस को विपक्ष के नेता का पद भी नसीब नहीं हुआ। महाराष्ट्र में शिवसेना के सरकार में शामिल होने पर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस यहां विपक्ष के नेता पद की दावेदार है लेकिन लगता है यहां भी कांग्रेस हाथ मलती रह जाएगी।
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विधानसभा में कांग्रेस के 42 और एनसीपी के 41 विधायक हैं लेकिन कांग्रेस के पांच विधायकों के निलंबन के कारण एनसीपी की दावेदारी मजबूत हो सकती है। इसलिए इस पद को लेकर कांग्रेस-एनसीपी आमने-सामने आ गए हैं।

महाराष्ट्र में भाजपा के बाद सबसे बड़ा दल होने के कारण शिवसेना को विपक्ष के नेता का पद मिला है। शुक्रवार को जब शिवसेना सरकार में शामिल हो जाएगी तब विपक्ष के नेता पद को लेकर झगड़ा शुरू हो जाएगा।
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सूत्रों का कहना है कि सत्तारूढ़ भाजपा यह नहीं चाहती कि कांग्रेस को विपक्ष के नेता का पद मिले। स्वाभाविक तौर पर सरकार का झुकाव एनसीपी की तरफ है और एनसीपी की उम्मीद विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े से हैं।
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कांग्रेस के 42 विधायकों में से पांच निलंबित

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे ने कहा है कि सात दिसंबर को कांग्रेस विपक्ष के नेता पद का दावा करेगी। एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने भी इसी दिन नेता विपक्ष पद के लिए दावा ठोंकने की बात कही है।

मलिक का कहना है कि एनसीपी के 41 विधायक हैं। पार्टी ने चुनाव पूर्व बहुजन विकास आघाड़ी से गठबंधन किया था, जिसके तीन विधायक हैं। इसके अलावा बडनेरा से निर्दलीय विधायक रविराणा को भी एनसीपी ने समर्थन दिया था।

इस तरह कांग्रेस के 42 विधायकों के मुकाबले एनसीपी की संख्या 45 हो जाएगी। हालांकि विधानभवन सचिवालय के मुताबिक सिर्फ एनसीपी के चुनाव चिन्ह पर लड़े विधायकों को ही एनसीपी का विधायक माना जा सकता है। पर, एनसीपी के पास दूसरा फार्मूला भी तैयार है।

विधानसभा में कांग्रेस के पांच विधायक निलंबित है, यदि सदन में उनकी गणना नहीं होती है तो कांग्रेस की सदस्य संख्या 37 रह जाएगी जबकि एनसीपी के 41 विधायक गिने जाएंगे। इसके जरिए महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता पद पर एनसीपी की लॉटरी लग सकती है।
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