लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस को विपक्ष के नेता का पद भी नसीब नहीं हुआ। महाराष्ट्र में शिवसेना के सरकार में शामिल होने पर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस यहां विपक्ष के नेता पद की दावेदार है लेकिन लगता है यहां भी कांग्रेस हाथ मलती रह जाएगी।
विधानसभा में कांग्रेस के 42 और एनसीपी के 41 विधायक हैं लेकिन कांग्रेस के पांच विधायकों के निलंबन के कारण एनसीपी की दावेदारी मजबूत हो सकती है। इसलिए इस पद को लेकर कांग्रेस-एनसीपी आमने-सामने आ गए हैं।
महाराष्ट्र में भाजपा के बाद सबसे बड़ा दल होने के कारण शिवसेना को विपक्ष के नेता का पद मिला है। शुक्रवार को जब शिवसेना सरकार में शामिल हो जाएगी तब विपक्ष के नेता पद को लेकर झगड़ा शुरू हो जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि सत्तारूढ़ भाजपा यह नहीं चाहती कि कांग्रेस को विपक्ष के नेता का पद मिले। स्वाभाविक तौर पर सरकार का झुकाव एनसीपी की तरफ है और एनसीपी की उम्मीद विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े से हैं।