कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की गैर मौजूदगी में बुधवार को पार्टी ने जंतर-मंतर पर भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कई कांग्रेसी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तल्ख हमला करते हुए शब्दों की मर्यादा तक तोड़ दी।
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने चुनौती देते हुए कहा कि किसानों की जमीन उद्योगपतियों को देने की नीयत रखने वाली सरकार, क्या ये जमीन उसके बाप की है। वहीं राज बब्बर ने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि नरेंद्र दामोदर दास मोदी से कि तू क्या जानता है, तू सिर्फ कारपोरेट से अपने सूट की बोली साढ़े चार करोड़ में लगवाना जनता है। यहां वे किसान बैठे हैं, जिनके बेटे सीमाओं पर तैनात है। दामोदर मोदी तुझे क्या पता है।
जमीन वापसी आंदोलन के बैनर तले हुए धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोदी जनता को ठग कर सत्ता में आए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ अरबपति लोग हैं तो दूसरी तरफ किसान और भूमिहीन लोग हैं। मोदी सरकार, फैसला तो करना होगा कि वह किसके साथ है। वहीं अहमद पटेल ने कहा कि कांग्रेस हमेशा मध्यवर्ग और गरीबों के साथ है। वे कांग्रेस मुक्त की बात करते थे और अब नौ महीने बाद देश को किसान मुक्त करने का भी फैसला कर लिया है।
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पटेल ने कहा कि हमारी पार्टी ने हमेशा देश और उसके ऊपर मानव कल्याण को रखा है, आप इस संदेश को यहां से जाने के बाद अपने अपने इलाकों में फैलाए। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने यूपीए सरकार के भूमि अधिग्रहण विधेयक के किसानों के हितों से जुड़े प्रावधान को हटा दिया है। किसानों की सहमति का क्लॉज जानबूझकर हटाया गया है। देश में सामंती व्यवस्था फिर वापस लाने की कोशिश मोदी सरकार कर रही है। हरियाणा में रोहतक से सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि अगर सरकार ने भूमि अधिग्रहण विधेयक नहीं बदला तो दिल्ली का घेराव किया जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मंत्रालयों का घेराव कर मोदी सरकार पर इस काले कानून को बदलने के लिए दबाव डाला जाएगा।
मुलायम ने साधा मोदी सरकार पर निशाना
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने यूपी सरकार का गुणगान करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा जुबानी हमला बोला। धर्मांतरण और बड़बोले बयानों की याद दिलाते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि देश के सांप्रदायिक माहौल को खराब कर सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का अपना ही सपना पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने सवाल किया कि आखिर तमाम दावों के बावजूद आपत्तिजनक बयानबाजी और घर वापसी जैसे कार्यक्रम रुक क्यों नहीं रहे। सरकार अगर इसे सख्ती से नहीं रोकती तो इसका साफ मतलब है कि उसकी भी इसमें पूरी सहमति है।
घर वापसी कार्यक्रम और बढ़ती आपत्तिजनक बयानबाजी के लिए भी मुलायम ने सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई न कर सरकार ने ऐसा ही संदेश दिया है। सपा प्रमुख ने मोदी सरकार के नौ महीने के कार्यकाल के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में कोई बदलाव न होने का आरोप लगाया और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि नौ महीने का समय कम नहीं होता, इतनी अवधि में तो बच्चे का भी जन्म हो जाता है। उन्होंने सरकार को बयानबाजी के बदले बिजली, सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश को तरक्की की राह पर ले जाने की नसीहत भी दी।
मुलायम ने इस दौरान यूपी सरकार के कामकाज की जम कर तारीफ की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी वर्गों के विकास पर ध्यान दे रही है। किसानों, छात्रों और महिलाओं की समस्याएं सुलझाई गई है, क्योंकि सरकार सही अर्थों में सभी वर्ग के विकास की इच्छुक है।
सपा प्रमुख ने विदेश नीति पर सरकार को सीख दी। उन्होंने कहा कि पड़ोसियों से संबंध कमजोर बन कर मत बनाइए क्योंकि कमजोर की कोई नहीं सुनता जबकि मजबूत होने पर दोस्त अपने आप बन जाते हैं।
मोदी को न्योता देने पर सफाई अपने पोते के तिलक कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी को न्योता दिए जाने पर मुलायम ने यह कह कर सफाई दी कि उन्होंने भाजपा को नहीं, देश के पीएम को निमंत्रण दिया था। बकौल मुलायम, कई लोगों, जिसमें उनकी पार्टी के लोग भी थे, ने इस न्योते पर सवाल उठाया था। मुलायम ने अपने कदम को सही ठहराते हुए कहा कि मोदी भाजपा के नहीं देश के प्रधानमंत्री हैं और इसीलिए उन्होंने पीएम को अपने गांव सैफई आने का निमंत्रण दिया था।
पीएम को विपक्ष से नहीं अपनों से खतरा
मोदी सरकार के पिछले नौ महीनों के दौरान धर्मांतरण, लव जिहाद और सांप्रदायिक हमलों की याद दिलाते हुए राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगाह किया है कि उन्हें कांग्रेस या दूसरी विपक्षी पार्टी से नहीं, बल्कि अपने लोगों से ही खतरा है। अगर वे वाकई देश में एकता बनाने में विश्वास रखते है तो हिंदुत्व की दुहाई देने वालों को काबू में रखें।
राज्य सभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि घर का भेदी ही लंका ढहाता है। घर वापसी, लव जिहाद और हाल में हुए चर्च पर हमले जैसे मामलों की याद दिलाते हुए गुलाम नबी ने कहा कि यह उनके लिए राजनीतिक मुसीबत खड़ा कर सकती है। गुलाम नबी ने कहा कि ऐसा किसी ग्रंथ में नहीं लिखा कि कोई अच्छा हिंदू या मुस्लिम अच्छा धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता। मोदी सरकार में बड़बोलेपन, आपत्तिजनक बयानों और धर्मांतरण जैसे कार्यक्रमों के जरिए पहले ही कई नेता सवालों के घेरे में आ चुके हैं। शीतकालीन सत्र में वे विपक्ष के निशाने पर भी रहे थे।
उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तत्व देश की एकता को प्रभावित करने में जुटे हुए हैं, जबकि हमें आतंकवाद, नक्सलवाद, गरीबी जैसे मामलों पर एकजुट होने की जरूरत है। अगर ऐसे संगठनों पर रोक लगी तो केंद्र की सभी योजनाएं कामयाब हो सकेगी। उन्होंने चर्चा के दौरान कहा कि एनडीए सरकार ने कोई भी नई योजना पेश नहीं की है, बल्कि यूपीए की योजनाओं को नए नामों से पेश किया जा रहा है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण से कई सामाजिक मुद्दों के गायब होने पर विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथ लिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा काम करने में जीरो और प्रचार में हीरो है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पिछले साल के अभिभाषण में नए आईआईटी, आईआईएम, एम्स और नागरिकों की सुरक्षा का प्रमुखता से उल्लेख किया गया था। लेकिन इस बार इनका जिक्र तक नहीं था। अल्पसंख्यकों और महिलाओं को संसद और विधानसभा में आरक्षण के प्रस्ताव की भी अनदेखी की गई।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों पर मोदी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की बात कही थी। लेकिन पिछले एक साल में ही सबसे ज्यादा ऐसी वारदातें हुई हैं। काले धन का मुद्दा चुनाव प्रचार में तो जमकर छाया रहा लेकिन अभी तक इस दिशा में कुछ विशेष नहीं हुआ है। इससे यह साबित होता है कि सरकार काम करने से ज्यादा प्रचार में आगे है। सरकार को यह याद होना चाहिए कि पिछले नौ महीनों में प्रधानमंत्री ने जमीन से लेकर आसमान तक के लिए जितनी योजनाओं का उद्घाटन किया है, वह सभी यूपीए के कार्यकाल में शुरू की गई थीं। इस सरकार का ज्यादा समय अध्यादेश बनाने में लगा जबकि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए कई बिल संसद में लंबित हैं। गुलाम नबी ने आरोप लगाया कि सरकार ने यूपीए के कार्यक्रमों को नए नाम से पेश कर दिया है। यूपीए के निर्मल भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन, वित्तीय समावेश योजना को जन धन योजना, कौशल विकास मिशन को स्किल इंडिया और योजना आयोग को बदलकर नीति आयोग कर दिया गया।
समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने ’सबका साथ सबका विकास’ का नारा दिया था लेकिन इससे हटकर काम हो रहा है। उन्होंने कहा किस स्वच्छता का संबंध गरीबी से है। सरकार चाहे कितनी भी योजनाओं को बनाए अगर गरीबी खत्म नहीं होगी तो स्वच्छता मिशन सफल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की बात कही गई थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।