देश के राष्ट्रीय राजनैतिक दल कांग्रेस के पास पैसे नहीं बचे हैं? हां! सही पढ़ा आपने। इसलिए कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं से सालाना 250 रुपए सहयोग करने के लिए कहा है।
कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोती लाल बोरा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में संवाददाताओं से कहा कि कार्यकर्ताओं द्वारा मिले पैसों का 25 प्रतिशत प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को दिया जाएगा वहीं 75 प्रतिशत कांग्रेस के पास रहेगा।
उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए कि इस नीति को सदस्यता अभियान के अंतर्गत भी लाया जाएगा। वहीं पार्टी के संगाठनात्मक चुनाव जो बीते महीने शुरु होने थे वो अगले आदेश आने तक के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं।
सांसद और विधायक को भी देनी होगी तनख्वाह
मौजूदा हालत में पार्टी के हर सांसद और विधायक को अपने एक माह की सैलरी देनी होगी वहीं एआईसीसी के प्रत्येत मेंबर को 600 रुपए वार्षिक देना होगा, वहीं पीसीसी सदस्यों को 300 रुपए देना होगा।
यह नया कानून कांग्रेस की सभी राज्य इकाईयों के लिए है। साथ ही साथ इसके भी निर्देश हैं कि राज्य इकाईयों को प्राप्त होने वाली कुल राशि में से प्रत्येक राज्य इकाई 50 प्रतिशत अपने जिले की इकाईयों को देंगे।
बताते चलें कि 12 साल पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी मनमोहन सिंह के अंतर्गत एक कमेटी का गठन किया था जब केन्द्र में पार्टी विपक्ष में थी।
11 लाख सक्रिय कार्यकर्ता है
कांग्रेस को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए गठित पैनल ने इस बात की
अनुशंसा की है कि कुल इकट्ठा हुई राशि का 75 प्रतिशत पार्टी की केन्द्रीय
इकाई के पास होगा वहीं , 12.5 प्रतिशत पीसीसी के पास , और बाकी के 12.5
प्रतिशत राशि जिलों की इकाईयों के पास होगी।
फिलहाल कांग्रेस में फिलहाल 11
लाख के करीब सक्रिय कार्यकर्ता है जिससे पार्टी को उम्मीद है कि 11 करोड़
रुपए इकट्ठा हो जाएंगे। बोरा ने कहा कि इतनी राशि किसी भी गैर चुनावी वर्ष में पार्टी को संचालित करने के लिए काफी है।