उत्तराखंड की कमला की जिद ही थी, जिसने उन्हें अमेरिका में इतिहास रचने का मौका दिया। वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक जीतकर कमला ने उत्तराखंड पुलिस और उत्तराखंड की पहली महिला मुक्केबाज बनने का गौरव हासिल किया है। चैंपियन बनकर कमला भी खुश हैं और उनके कोच एवं दोस्त भी।
करीब तीन माह पहले वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स के लिए भारतीय पुलिस टीम की सूची बनने लगी थी। तब बढ़ती उम्र के कारण कमला बिष्ट (33 साल) को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया गया था और ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में उनसे हारी खिलाड़ी को चुना गया। यह बात खुलते ही कमला ने विरोध किया।
यही नहीं कमला को प्रैक्टिस छोड़कर देहरादून आकर उच्च अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखनी पड़ी। पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आखिर में तमाम विरोध के बाद चयनकर्ताओं को सूची बदलनी पड़ी और कमला को वर्ल्ड पुलिस एवं फायर गेम्स का टिकट मिला।