सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राज्य प्रशासनिक सेवा (एससीएस) के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में प्रमोशन देने में लगे आयु सीमा के प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने को कहा है।
सर्वोच्च अदालत ने चार सप्ताह में केंद्र को 54 साल की उम्र के बाद राज्य के अधिकारियों को आईएएस में पदोन्नत नहीं करने के मुद्दे पर राज्यों के पक्ष पर गौर करने को भी कहा है।
साथ ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र व गुजरात प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुति देने को कहा है। केंद्र ने वर्ष 1979 में भारतीय प्रशासनिक सेवा नियम के क्लॉज 5(3) में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को 54 साल की निर्धारित उम्र तक ही पदोन्नति देना तय किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए है निर्देश
जस्टिस जेएस केहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए विभिन्न राज्यों के अधिकारियों से कहा कि चार सप्ताह में वह सक्षम केंद्रीय प्राधिकार के समक्ष अपना प्रस्तुतिकरण दें।
केंद्र चार सप्ताह में एससीएस अधिकारियों से संबंधित उस नियम पर पुनर्विचार करेगी, जिसमें 54 साल की उम्र तक की आईएएस में पदोन्नत किया जाना तय किया गया था। पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता यूके उनियाल व अधिवक्ता डीके गर्ग ने कहा कि जब एससीएस के अधिकारियों के सेवानिवृत्ति की उम्र समान है तो फिर केंद्र की ओर से राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को पदोन्नति देना 54 साल की उम्र में प्रतिबंधित कैसे किया जा सकता है।
नियम के मुताबिक नहीं बन पा रहे थे आईएएस
वहीं अधिवक्ता प्राणेश ने तर्क दिया कि केंद्र की ओर से 1979 में बदलाव कर इस बेतुके नियम को लागू किया जाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के खिलाफ है क्योंकि इससे समानता का अधिकार और समानता का अवसर प्रभावित होता है।
पीठ ने तर्कों पर केंद्र को पुनर्विचार करने का निर्देश जारी करते हुए कहा कि यदि इसका हल सरकार अपने स्तर पर नहीं निकाल पाएगी तो याचिकाकर्ताओं को निर्धारित समय के बाद अदालत में आवेदन करने की छूट है।
याद रहे कि इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने फरवरी, 2011 में केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्युनल के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा नियम के क्लॉज 5(3) को निरस्त कर दिया गया था। यही क्लॉज एससीएस अधिकारियों के 54 साल की उम्र पार करने पर आईएएस में पदोन्नत करने पर रोक लगाता है।
कोर्ट ने कहा गौर करें
गौरतलब है कि कैट ने 30 नवंबर, 09 को एस पुत्तास्वामी की याचिका पर इस क्लॉज को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश को विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सर्वोच्च अदालत ने इन याचिकाओं पर ही केंद्र को इस क्लॉज पर पुनर्विचार करने और एससीएस अधिकारियों को सक्षम प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुति देने को कहा है।