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36 मुस्लिमों की हत्या के आरोपी , 4 अफसरों पर चार्जशीट

Mon, 20 Jul 2015 06:52 PM IST
दिलीप कुमार शर्मा/ गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
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असम के बाक्सा ज़िले में पिछले साल 36 मुसलमान ग्रामीणों की हत्या के मामले में असम वन विभाग के चार अधिकारियों के ख़िलाफ आरोप पत्र दाख़िल किया गया है।
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बोडो बहुल क्षेत्रों में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के संगबिजित गुट के सदस्यों ने कथित तौर पर 36 मुसलमान ग्रामीणों की हत्या की थी।मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एंजेंसी (एनआईए) की गुवाहाटी शाखा ने वन विभाग के अधिकारियों को भी इन हत्याओं में शामिल बताया है और उनके ख़िलाफ आरोप पत्र दाख़िल किया है।

पिछले वर्ष मई में बाक्सा ज़िले के गोबरधना थाना क्षेत्र के नरसिंगबाड़ी गांव में एनडीएफबी (एस) के चरमपंथियों ने हमला किया और अल्पसंख्यक समुदाय के 36 लोगों को निशाना बनाया।
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मरने वालों में बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा

मरने वालों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे, ग्रामीणों के घरों को आग लगा दी गई थी।एनआईए की विशेष अदालत में बुधवार को दायर दो अलग-अलग आरोप पत्रों में कहा गया है कि कथित रूप से असम वन विभाग के चार अधिकारी भी हत्याओं में शामिल थे।

छह अन्य अभियुक्तों के अलावा एनआईए ने वन विभाग के राजेन बोडो, जयंत बोडो, मल्लजित खेरकाटरी और निजवम बसुमतारी को भी आरोपी बनाया है।

वन विभाग के चार अधिकारियों के ख़िलाफ़ गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत आरोप पत्र दायर किया है।ये चारों अधिकारी मानस बाघ परियोजना के तहत बांसबाड़ी वन रेंज में तैनात थे।

ग्रामीण मुस्लिमों का समझा जाता है बाहरी

इन चार वन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने एनडीएफबी (एस) उग्रवादियों के साथ मिलकर पीड़ितों पर गोलियां बरसाईं, जबकि उन्हें हथियार जंगल की रक्षा के लिए दिए गए थे।

चश्मदीदों के मुताबिक़ बोडो उग्रवादियों ने पीड़ितों पर नज़दीक से फायरिंग की थी।आरोप पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण मुसलमानों को बाहरी समझा जाता है जिस वजह से उनकी हत्याएं की गईं।

यह वही इलाक़ा है जहां बोडो और बांग्ला भाषी मुसलमानों के बीच 2012 के दंगों में 100 से अधिक लोग मारे गए थे और पांच लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।
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संवेदनशील घोषित है क्षेत्र

इन दंगों में इस विद्रोही गुट के शामिल होने की जांच चल रही है।असम सरकार के गृह विभाग ने बोडोलैंड क्षेत्रीय प्रशासनिक चार ज़िलों को जातीय तौर पर संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया है।

पुलिस के मुताबिक क्षेत्र में एनडीएफबी (एस) ने तीन साल में 588 से ज़्यादा लोगों का अपहरण किया है।वहीं इससे भी ज़्यादा मामले लोगों से जबरन धन वसूली के है।
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