आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन मामले में सोनिया गांधी के खत के बाद भले ही सपा और कांग्रेस आमने सामने आ गई है, मगर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कड़े रुख को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने का इरादा छोड़ दिया है।
साथ ही राज्य सरकार को भरोसे में लेकर ही आगे का कदम उठाने के संकेत दिए जा रहे हैं। इस सिलसिले में केंद्र और राज्य सरकार के बीच कुछ और पत्राचार संभव है।
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कार्मिक राज्यमंत्री नारायणसामी ने शनिवार को कहा था कि केंद्र इस मामले में दखल दे सकता है। मगर जिस तरह से राजनीतिक हालात बदले है। उसे देखते हुए केंद्र के लिए सीधे हस्तक्षेप करना मुश्किल हो गया है। इसीलिए प्रधानमंत्री ने भी सोमवार को नियमों का पालन करने की बात की।
साथ ही नारायण सामी ने भी सोमवार को सुर नरम करते हुए कहा है कि निलंबित अधिकारी अर्जी दें तब केंद्र विचार कर सकता है।
केंद्र स्वत: ही संज्ञान लेते हुए कार्रवाई नहीं कर सकता। इसका संकेत यही माना जा रहा है कि केंद्र सरकार हैरतअंगेज फैसला लेने से परहेज करेगी।
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन दुर्गा शक्ति के मामले में सपा अकेले पड़ गई। सभी दलों ने यूपी सरकार को चौतरफा घेर लिया है। मगर सपा ने अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। सपा ने इस पूरे प्रकरण को संघीय ढांचे के उल्लंघन का मामला बना लिया है।
मुलायम सिंह यादव ने दुर्गा शक्ति के निलंबन के अखिलेश के फैसले को सही ठहराया है। साथ ही सपा ने सभी आईएएस अधिकारियों को ही वापस बुलाने की बात कह दी है। सपा के इस रुख को लेकर केंद्र गंभीर है।
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कार्मिक राज्यमंत्री नारायणसामी ने भी कहा है कि निलंबित अधिकारी ने हमसे अभी तक संपर्क नहीं किया है। अगर वह हमें अपनी अपील भेजती हैं तो हम इसकी प्रतिलिपि राज्य सरकार को भेजेंगे और उसका जवाब मांगेंगे।
उसके बाद ही हम आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय ले सकते है। सामी ने स्पष्ट कहा है कि केंद्र सरकार स्वत: ही संज्ञान लेते हुए कार्रवाई नहीं कर सकती
कांग्रेस के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी ने दुर्गा शक्ति मामले में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तूल पकड़ते इस मामले में अपना मत जरूर जाहिर किया है। मगर पार्टी और केंद्र सरकार दोनों इस सिलसिले में प्रदेश की सपा सरकार से सीधे टकराव लेने के मूड में नहीं है।
एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस सिलसिले में नियमों के मुताबिक ही आगे बढ़ा जाएगा। साथ ही राज्य सरकार को भरोसे में लेकर ही आगे की बात की जाएगी। सपा और कांग्रेस के बीच आई तल्खी को दूर करने के लिए भी कोशिशें शुरू हो गई हैं।
पर्दे के पीछे से मुलायम और अखिलेश को मनाकर इस खींचतान को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार को संसद में अभी कई बिलों को लेकर सपा के समर्थन की जरूरत है।
खाद्य सुरक्षा, बीमा, पेंशन और कंपनी बिल समेत तमाम मुद्दों पर सरकार को सपा के समर्थन की जरूरत है। सोमवार को खाद्य सुरक्षा बिल पर सपा मुखिया मुलायम सिंह की नरमी भी काफी अहम मानी जा रही है।