हमारे देश के नेताओं की पारदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 77 में से 35 केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री के सामने अपनी संपत्ति और देनदारियों का वार्षिक ब्योरा पेश नहीं कर पाए।
जबकि तय समय सीमा को बीते एक महीना हो चुका है। संपत्ति का ब्योरा पेश करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त थी। इस निर्धारित समय तक 32 में से 18 केंद्रीय मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले 12 राज्य मंत्रियों में से सात और 33
राज्य मंत्रियों में से 17 ने ही अपनी संपत्ति का ब्योरा पेश किया है। जिन मंत्रियों ने अब तक अपना ब्योरा जमा नहीं कराया है, उनमें स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, केंद्रीय उड्डयन मंत्री अजित सिंह, कानून मंत्री कपिल सिब्बल, कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, मानव संसाधन मंत्री एमएम पल्लम राजू और जल संसाधन मंत्री हरीश रावत शामिल हैं।
राज्य मंत्रियों की बात करें, तो शशि थरूर (मानव संसाधन), आरपीएन सिंह (गृह), डी पुरुनदेश्वरी (वाणिज्य), प्रदीप जैन (ग्रामीण विकास) और अधीर रंजन चौधरी (रेलवे) ने भी अब तक पीएम के समक्ष अपनी संपत्ति का ब्योरा पेश
नहीं किया है।
हालांकि रक्षा मंत्री एके एंटनी, कृषि मंत्री शरद पवार, गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, वित्त मंत्री पी चिदंबरम, वीरप्पा मोइली, मल्लिकार्जुन खडगे, ऑस्कर फर्नांडीज और सलमान खुर्शीद अपनी संपत्ति की घोषणा कर चुके हैं।
मंत्रियों के लिए तैयार की गई आचार संहिता के मुताबिक केंद्र और राज्य में सभी मंत्रियों को अपने व अपने परिवार के सदस्यों की संपत्ति, देनदारियों और व्यापारिक हितों का ब्योरा प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के समक्ष देना होता है।
हर साल कैबिनेट सेक्रेटरी इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों को लिखकर सूचना देता है और उन्हें 31 अगस्त तक अपनी
जानकारी पेश करनी होती है। इसे बाद में प्रधानमंत्री की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाता है।