राजधानी के विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक कोर्सों का बुरा हाल है।
लखनऊ विश्वविद्यालय ही नहीं बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय और इस साल खुले उर्दू-अरबी फारसी विश्वविद्यालय में भी छात्र रोजगारपरक कोर्सों में दाखिला लेना नहीं चाहते।
इसकी बजाये वे ट्रेडिशनल कोर्सों में दाखिला लेना अधिक पसंद करते हैं। इसके पीछे एक ही कारण है कि इन कोर्सों की पढ़ाई के बाद उनका अच्छा प्लेसमेंट नहीं हो पाता।
जितनी फीस ली जाती है उसके अनुसार छात्रों को सुविधाएं भी नहीं मिलती। ऐसे में छात्रों का इन कोर्सों से मोहभंग होता जा रहा है। एलयू में इस बार भी कुल 38 कोर्स ऐसे हैं जिनमें छात्रों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।
जबकि विवि प्रशासन ने इस कोर्सों में एडमिशन के लिए नियम में ढील भी दी थी। पहले 40 प्रतिशत सीटें भरने पर कोर्स चलाने का नियम था मगर इस बार 20 प्रतिशत सीटें भरने पर भी कोर्स चलाने की मंजूरी दी गई।
इसके बावजूद इन कोर्सों की तरफ छात्र आकर्षित नहीं हुए। दरअसल यह कोर्स एक-एक कमरे में चलाए जा रहे हैं और प्लेसमेंट की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
एलयू से पीजी डिप्लोमा का कोर्स करने वाले छात्र सुजीत और अभिजीत कहते हैं कि जितनी फीस ली जाती है उसके अनुसार न तो सुविधाएं मिलती हैं और न पढ़ाई का स्तर है।
प्लेसमेंट के लिए यहां कभी इंडस्ट्री इंटरेक्शन नहीं होता। छात्रों को जॉब के लिए खुद दौड़भाग करनी पड़ती है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (बीबीएयू) में भी इस साल 48 इनोवेटिव व कंटमप्रेरी कोर्स लांच किए गए।
मगर इन कोर्सों में से महज 19 कोर्स ही चल पाए। इसका मुख्य कारण यह था कि बीबीएयू में ये कोर्स बिना संसाधनों के शुरू कर दिए गए। आलम यह था कि कुछ कोर्सों के छात्रों की क्लास ऑडिटोरियम में लगवाई गई।
जबकि रोजगारपरक कोर्सों में छात्र अच्छी सुविधाएं और प्लेसमेंट के लिए ही दाखिला लेते हैं। इस साल से शुरू हुई ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में भी 28 वोकेशनल कोर्स शुरू करने की कवायद की गई लेकिन ट्रेडिशनल कोर्सों के मुकाबले इन कोर्सों में दाखिला लेने को कोई तैयार ही नहीं हुआ।
बहुत कम आवेदन फॉर्म आने के कारण इस साल यह 28 कोर्स नहीं शुरू हो पाए। इसके पीछे भी बड़ा कारण यह है कि स्टूडेंट का माइंड सेट बन गया है कि वोकेशनल कोर्स में दाखिला लेने से कोई खास फायदा नहीं होता।
उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सैय्यद हैदर का कहना है कि हमारी यूनिवर्सिटी में 28 वोकेशनल कोर्स इस बार नहीं शुरू हो पाए। क्योंकि इनमें आवेदन फॉर्म ही बहुत कम आए थे।
शायद राजधानी में छात्र वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई के लिए उतना अधिक जागरूक नहीं हैं। कोर्स शुरू करने के लिए एक निश्चित संख्या में छात्रों का होना बहुत जरूरी है।
हमें भरोसा है कि यह कोर्स अगले साल अच्छे ढंग से चलेंगे। वैसे भी यूनिवर्सिटी का यह पहला शैक्षिक सत्र है।
वहीं बीबीएयू के प्रवक्ता डॉ. गोविन्द जी पांडेय का कहना है कि नए शुरू हुए कंटमप्रेरी व इनोवेटिव कोर्सेज में पढ़ाई बहुत अच्छे ढंग से हो रही है। पहली बार यूनिवर्सिटी ने यह कोर्स लांच किए हैं।
छात्रों के बीच जागरूकता की कमी के कारण सभी कोर्स नहीं शुरू हो पाए। इंफ्रास्ट्रक्चर की विवि में कोई कमी नहीं है। जो भी छात्र यहां पढ़ रहे हैं उन्हें उच्च स्तरीय सुविधाएं दी जा रही हैं।
इस बार शुरू किए गए जो कोर्स चल नहीं पाए हैं वे अगले वर्ष से अच्छे ढंग से चलेंगे।
एलयू में अच्छे कोर्स मगर कोई पुरसाहाल नहीं
लखनऊ विश्वविद्यालय में एक से एक रोजगारपरक कोर्स तो खोले गए लेकिन उनका मैनेजमेंट ढंग से न होने के करण वह बंद होते चले गए।
पीजी डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस कोर्स उत्तर भारत के शायद ही किसी विवि में पढ़ाया जाता हो लेकिन एलयू में यह कोर्स नहीं चल पाया।
बीबीएयू में फीस घटाने पर भी नहीं चले कोर्स
बीबीएयू में इस बार 48 नए कोर्स लांच किए गए। इन कंटमप्रेरी व इनोवेटिव कोर्स में छात्रों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। दाखिले के लिए आवेदन फॉर्म ही बहुत कम आए।
ऐसे में 48 में से मात्र 24 कोर्सेज में ही दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा हुई और आखिरी में इनमें से 19 कोर्स ही चल पाए।
यहां पर एमए व एमएससी ह्यूमन एंड बॉयोस्फियर कोर्स की फीस 30 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर से कम करके 20 हजार रुपये की गई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
एमए व एमससी फै शन टेक्नोलॉजी एंड एपैरेल डिजाइनिंग कोर्स की फीस 40 हजार रुपये से फीस घटाकर 20 हजार कर दी गई लेकिन यह कोर्स नहीं चला। इसके अलावा सेंटर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के तहत कोर्स शुरू किए गए कोर्स भी नहीं चले।
इसमें एमटेक एनर्जी एंड एनवॉयरमेंट, एमएससी फूड माइक्रोबॉयोलॉजी एंड टेक्सिकोलॉजी, एमएससी इंडस्ट्रियल माइक्रोबॉयोलॉजी, एमएससी पोस्ट हारवेस्ट टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, एमएससी क्लाइमेट चेंज एंड बॉयो डायवर्सिटी कंजर्वेशन, पीजी डिप्लोमा इन हॉर्टीकल्चर, एमएससी मेडिकल बॉयो केमेस्ट्री जैसे कई अच्छे कोर्स हैं जो इस बार शुरू नहीं हो पाए।