कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में सीबीआई जांच की प्रगति रिपोर्ट में सरकार के हस्तक्षेप पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और जांच एजेंसी दोनों को कड़ी फटकार लगाई।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि सीबीआई पिंजरे में बंद ऐसा तोता बन गई है जो अपने मालिक की बोली बोलता है। यह ऐसी अनैतिक कहानी है जिसमें एक तोते के कई मालिक हैं।
बाहरी दखल से मुक्त हो सीबीआई
अदालत ने सीबीआई को बाहरी प्रभावों और दखल से मुक्त करने के लिए सरकार से 10 जुलाई तक कानून बनाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि कोलगेट की जांच रिपोर्ट के ‘मूल तत्व’ को ही बदल दिया गया।
सर्वोच्च अदालत ने रिपोर्ट में बदलाव पर सीबीआई, प्रधानमंत्री कार्यालय व कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की कड़ी आलोचना की। उसने कहा कि सीबीआई को सभी दबावों से निपटना आना चाहिए।
'रेत की तरह भुरभुरे हैं आप'
न्यायालय ने कहा, ‘आप (सीबीआई) इतने संवेदनशील मामले में भी अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आपको 15 साल पहले (विनीत नारायण मामले में) ताकतवर बनाया था। आपको खुद को चट्टान की तरह सख्त बनाना चाहिए, लेकिन आप रेत की तरह भुरभुरे हैं। हम बहुत प्रोफेशनल, बहुत उच्च कोटी की और बेहद सटीक जांच चाहते हैं।’
अदालत ने कहा सीबीआई को अपनी जांच कानून मंत्री सहित अन्य किसी से भी साझा नहीं करनी चाहिए थी। कोयला घोटाले पर तीन घंटे तक लगातार सुनवाई चली।
जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीबीआई को प्रगति रिपोर्ट या इससे संबंधित सामग्री 33 सदस्यीय जांच दल और ब्यूरो के निदेशक के अलावा किसी के साथ साझा नहीं करने का निर्देश दिया। पीठ में जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ भी शामिल थे।
पीठ ने कहा कि कोयला घोटाले की रिपोर्ट के ‘मूल तत्व’ को सरकारी अधिकारियों के सुझाव पर बदल दिया गया। इसके परिणामस्वरूप जांच की पूरी दिशा ही बदल गई। कोर्ट ने इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिवों को आड़े हाथों लिया।
पीठ ने कहा कि उनका सीबीआई से कोई लेना-देना नहीं है। भला कैसे संयुक्त सचिव जांच रिपोर्ट ले जा सकते हैं? जबकि इस मामले में कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के खिलाफ ही अनियमितताओं के कथित आरोप हैं।
कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की कि कोल ब्लॉक आवंटन का मामला दर्ज किए जाने के बाद एजेंसी की जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
अश्वनी कुमार की खिंचाई
उल्लेखनीय है कि सीबीआई निदेशक ने हलफनामे में कानून मंत्री अश्वनी कुमार, पीएमओ और कोयला मंत्रालय के सुझाव पर प्रगति रिपोर्ट में चार बदलाव किया जाना स्वीकार किया है।
पीठ ने कहा कि सीबीआई प्रमुख सुनिश्चित करें कि कोयला घोटाले की जांच की रिपोर्ट भविष्य में कानून मंत्री, अन्य केंद्रीय मंत्रियों, विधि अधिकारियों, सीबीआई के वकील और जांच ब्यूरो के अभियोजन विभाग सहित किसी भी व्यक्ति को नहीं दिखाई जाएगी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आगे कोयला आवंटन मामले में विशेष जांच दल के गठन के सहित तमाम पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
'इस्तीफा दें कानून मंत्री'
इस बीच विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद कानून मंत्री और एटॉर्नी जनरल के इस्तीफे की मांग की है।
समाजवादी पार्टी ने भी कानून मंत्री का इस्तीफा मांगा है, वहीं किरण बेदी ने कहा कि सीबीआई अब आजाद उड़ना पूरी तरह भूल गई है।
सुप्रीम कोर्ट की खरी खरी
- सीबीआई तोता है और इसके कई मालिक हैं। सीबीआई ऐसा तोता बन चुकी है जो अपने मालिक की बात को ही दोहराता है।
- हम चाहेंगे कि सुनवाई की अगली तारीख 10 जुलाई तक आप (सरकार) सीबीआई को बाहरी दखल से मुक्त करने के लिए कानून बना दें। हम जानते हैं कि इस काल में संसद नहीं चलेगी, लेकिन कानून बनाने के और भी रास्ते हैं।
- सीबीआई को सरकार और उसके अधिकारियों द्वारा डाले गए तमाम दबावों और विपरीत परिस्थितियों के बीच अपने पैरों पर खड़े होना आना चाहिए।
- सीबीआई का काम सरकार के अधिकारियों से बातचीत करना नहीं बल्कि सच का पता लगाना है।
- सीबीआई सरकार के प्रति जवाबदेह है लेकिन सरकार उसकी रिपोर्ट को छू भी नहीं सकती है। जांच रिपोर्ट कोई प्रगति रिपोर्ट नहीं है, जो सरकार और उसके अधिकारियों के साथ बांटी जाए।
- सीबीआई जांच रिपोर्ट को किसी के साथ बांट नहीं सकती, सिवा अपने निदेशक और जांच कर रही 33 सदस्यीय टीम के।
- केस दर्ज किए जाने के बाद कोयला घोटाले की जांच में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।
- यह बेहद चिंता की बात है कि सरकार सीबीआई के जांच मामलों में दखल दे रही है। यह ठीक नहीं है कि पीएमओ और कोयला मंत्रालय ने सीबीआई अधिकारियों को कोयला घोटाले की ड्राफ्ट रिपोर्ट में बदलाव की सलाह दी।
‘कुछ लोग पोप से भी ज्यादा पवित्र हैं’
सीबीआई की जांच में बार-बार दो संयुक्त सचिवों शत्रुघ्न सिन्हा (पीएमओ) और एके भल्ला (कोयला मंत्रालय) का नाम आने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, ‘कुछ लोग पोप से भी ज्यादा पवित्र होते हैं। वे या तो किसी और के कहने पर वहां (सीबीआई के पास) गए होंगे या फिर अपने मन से ही।’
कोर्ट का आशय उनकी सीबीआई के दस्तावेजों तक सहज पहुंच से था। अदालत ने कहा कि वह इस मामले की जांच वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के अनुरोध पर एसआईटी से कराने पर भी विचार कर रही है।
अटॉर्नी जनरल की सफाई
- मैंने सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात केवल कानून मंत्री की सलाह पर की।
- मैंने कोयला घोटाले में सीबीआई की जांच रिपोर्ट न देखने को मांगी और न ही वह मुझे मिली। मैंने सीबीआई से बदलाव के बारे में भी नहीं कहा।
पूर्व जांच अफसर को करें बहाल: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और सरकार से कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले मामले को शुरू से देख रहे डीआईजी रविकांत मिश्र को फिर जांच से जोड़ने को कहा है।
1998 बैच के ओडिशा के आईपीएस अधिकारी मिश्र का इंटेलिजेंस ब्यूरो में ट्रांसफर कर दिया गया था। हालांकि सीबीआई का कहना है कि एजेंसी में कार्यकाल पूरा होने पर खुद उन्होंने पारिवारिक कारणों से स्थानांतरण मांगा था।
कांग्रेस बोली, कोर्ट के आदेश मानेंगे
हम अब भी मानते हैं कि सीबीआई, कानून मंत्री और अधिकारियों की मुलाकात में कुछ भी गलत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के सुझावों को हमने ध्यान से देखा है। इससे भविष्य में होने वाली जांचों को युक्तिसंगत बनाने में मदद मिलेगी। हम ध्यान रखेंगे कि कोर्ट के आदेशों का पालन हो। मुझे नहीं लगता कि मामले की आंच पीएम तक आ रही है।- रेणुका चौधरी, कांग्रेस प्रवक्ता
क्यों न सेवानिवृत्त जज की देखरेख में हो जांच
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से यह भी जानना चाहा कि कोल ब्लॉक जांच में क्या उसे तकनीकी विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त जज के मार्गदर्शन की आवश्यकता है?
सीबीआई ने कोर्ट से कहा था कि कुछ तकनीकी कारणों से वह कोल ब्लॉक की जांच को आगे नहीं बढ़ा सकी है। इसके बाद अदालत ने कहा कि क्या उसे तकनीकी विशेषज्ञ उपलब्ध कराए जाएं।
साथ ही उसने कहा कि यदि जरूरत हो एजेंसी को जांच आगे बढ़ाने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश का मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
दिल्ली में नहीं थे रंजीत सिन्हा
सुप्रीम कोर्ट जब सीबीआई-सरकार पर कड़ी टिप्पणियां कर रहा था तो जांच एजेंसी के निदेशक रंजीत सिन्हा दिल्ली में नहीं थे। एजेंसी सूत्रों के अनुसार वह ‘टूर’ पर पटना गए हुए थे और वहीं से पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए थे।
सरकार-सीबीआई के बीच अब नहीं हो सकेगा संवाद
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सख्त निर्देश देने के साथ-साथ सरकार से भी कहा है कि वह जांच एजेंसी के साथ किसी प्रकार का संवाद न करे। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई से कोई बात करने से पहले सरकार को अब उससे इजाजत लेनी पड़ेगी।
सरकार की खिंचाई से खुश हैं सीबीआई के अधिकारी
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच मामलों में हस्तक्षेप को लेकर सरकार की खिंचाई से एजेंसी के अधिकतर अधिकारी खुश हैं। हालांकि वे सामने आकर खुशी जाहिर करना नहीं चाहते। बुधवार को एजेंसी के तमाम वरिष्ठ अधिकारी टीवी से चिपके थे या फिर पल-पल की खबर ले रहे थे।
सुनवाई से पहले ही एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि कोर्ट को कुछ ‘कड़े निर्देश’ देने चाहिए, जिससे राजनीतिक दबाव खत्म हो।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक हस्तक्षेप से सीबीआई की आजादी का मुद्दा उठाया है। फिलहाल तो नियम कायदे ऐसे हैं कि रोजमर्रा के काम में भी हम सरकार पर निर्भर करते हैं।