पिछले सप्ताह फ्रेंच राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के दौरे के बाद सोमवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन तीन दिन के भारत दौरे पर पहुंच रहे हैं। लंदन से उड़ान भर कर वे मुंबई में उतरेंगे। उनका प्रयास 21वीं सदी में दोनों देशों के बीच रिश्तों को नई ऊंचाई देने का रहेगा।
इस दौरे में वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कुछ बड़े नेताओं से मिलेंगे। दोनों देशों के समान हितों से जुड़े मुद्दों पर इस दौरान बातचीत और समझौते होंगे। मई 2010 में प्रधानमंत्री बनने के बाद कैमरन की यह पहली भारत यात्रा है।
कैमरन के साथ एक उच्च-स्तरीय व्यावसायिक प्रतनिधिमंडल भी आ रहा है। इसके अतिरिक्त कई ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के उपकुलपति, विद्वान और ब्रिटिश मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी आ रहे हैं।
मुंबई में पहले दिन कैमरन हिंदुस्तान लीवर के हेडक्वार्टर जाएंगे। फिर तेज पैलेज होटल में व्यावसायिक समारोह में हिस्सा लेने के बाद सेंट जेवियर स्कूल पहुंचेंगे। इसके बाद उनका कार्यक्रम पुलिस मैमोरियल पर जाने का है। शाम को ही वे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
19 फरवरी को कैमरन की मुलाकात मनमोहन सिंह से होगी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी वे उसी दिन मिलेंगे। भारत यात्रा के लिए रवाना होने से पहले कैमरन ने कहा कि वह दोनों देशों के बीच 21वीं शताब्दी में सबसे बेहतरीन संबंध बनाना चाहेंगे।
कैमरन के लक्ष्य
- ब्रिटेन के छोटे और मझौले उद्योगों को भारत में आसानी से प्रवेश मिले।
- ब्रिटेन के रिटेल उद्योग के प्रतिनिधि और ब्रिटिश सुपरमार्केट चेन टेस्को के एक्जीक्यूटिव प्रतिनिधिमंडल में हैं।
- कैमरन चाहते हैं 2015 तक दोनों देशों के बीच व्यापार 23 अरब पौंड तक पहुंचे। 2010 में यह व्यापार 11.5 अरब पौंड था।
- कैमरन समझाएंगे कि वह अप्रवासियों की संख्या अपने देश में नियंत्रित तो करना चाहते हैं, लेकिन भारतीय छात्रों के आने पर कोई रोक नहीं है।
- वोडाफोन के 12 हजार करोड़ रुपये के बकाया टैक्स के मामले पर भी वह बात करेंगे। वोडाफोन ब्रिटिश कंपनी है। कैमरन कंपनी का पक्ष रखेंगे।
युद्धक विमानों की डील पर नजर
वायुसेना को और मजबूत बनाने के लिए भारत युद्धक विमान खरीदना चाहता है। ब्रिटेन चाहेगा कि वह उस छह अरब पौंड का सौदा हासिल कर ले, जिसे हाल में आए फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद नहीं पा सके। ब्रिटिश मीडिया में यह चर्चा है। कैमरन भारत को 100 यूरोफाइटर विमान खरीदने के लिए मनाने का प्रयास करेंगे।
ओलांद की यात्रा के दौरान युद्धक विमानों की डील पर हस्ताक्षर होने थे, जिसमें एक फ्रांसीसी कंपनी को राफेल जेट फाइटर की आपूर्ति का अनुबंध मिलना था, लेकिन हस्ताक्षर नहीं हुए। अत: कैमरन अपने देश में बने विमानों का सौदा भारत के साथ करने का प्रयास करेंगे।