केंद्र में निजाम बदलने के बाद गुजरात में लंबे अरसे से लटके चर्चित आतंकवाद विरोधी कानून को मंजूरी मिलने की राह खुल गई है। गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध निरोधक बिल 2015 (गुजकोक) को गृह मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है।
बतौर गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2001 में पहली बार इस कानून को राज्य विधानसभा में पेश किया था। मगर केंद्र की पिछली यूपीए सरकार ने तीन बार इस प्रस्तावित कानून को मंजूरी देने से मना कर दिया था। बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने गुजकोक को हरी झंडी देते हुए आगे की कार्यवाही के लिए इसे राष्ट्रपति के सचिवालय भेज दिया है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बिल कानून बन जाएगा। हालांकि गृह मंत्रालय के इस कदम पर सियासत शुरू हो गई है। जदयू महासचिव केसी त्यागी ने गृह मंत्रालय के कदम का विरोध करते हुए राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि इस विधेयक को लौटाएं। यह विधेयक जन अधिकारों का हनन करता है।
जबकि बिल के पक्ष में तर्क दे रहे गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद और संगठित अपराध से लड़ने के लिए गुजरात को अधिकार देने में पहले ही काफी देर हुई है।