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योगी को CM प्रोजेक्ट कर सकती है भाजपा

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विपक्ष भले ही गोरखपुर से भाजपा के सांसद योगी आदित्यनाथ के विवादास्पद बयानों को लेकर भाजपा और मोदी सरकार पर आक्रामक हो, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब योगी आदित्यनाथ ही भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख चेहरा होंगे।
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अगर 13 सिंतबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों में भाजपा को आशातीत सफलता मिलती है तो योगी आदित्यनाथ 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा का नेतृत्व कर सकते हैं और सही समय पर पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित कर सकती है।

यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रणनीति है कि लोकसभा चुनावों में हुए हिंदुत्व के ध्रुवीकरण को राज्य विधानसभा चुनावों में और मजबूती प्रदान की जाए, जिसके लिए योगी आदित्यनाथ से बड़ा और कारगर कोई दूसरा नाम भाजपा में नहीं है।
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भाजपा की हिंदुत्व राजनीति का चेहरा

यह जानकारी देने वाले संघ सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर प्रदेश में भगवा वेशधारी योगी आदित्यनाथ को उसी तरह भाजपा की हिंदुत्व राजनीति का चेहरा बनाना चाहता है जैसे कभी साध्वी उमा भारती को मध्य प्रदेश में भाजपा का चेहरा बनाया गया था।

योगी आदित्यनाथ न सिर्फ संघ नेतृत्व की पसंद हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गृह मंत्री राजनाथ सिंह का समर्थन भी उन्हे है। इसीलिए उन्हें विधानसभा उपचुनावों में भाजपा के चुनाव अभियान की कमान सौंपी गई है।

इससे एक तरफ तो योगी की लोकप्रियता और संघ भाजपा केहिंदुत्व कार्ड की राजनीतिक परीक्षा हो जाएगी, दूसरे अभी तक गोरखपुर और पूर्वांचल के कुछ हिस्सों तक ही अपना प्रभाव रखने वाले आदित्यनाथ की ध्रुवीकरण की राजनीति का प्रसार प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी हो सकेगा, जिससे अगले दो ढाई सालों में भाजपा के लिए हिंदुत्व की जमीन तैयार हो सकेगी।

भाजपा को आक्रामक चेहरे की जरूरत

संघ के करीबी एक भाजपा नेता के मुताबिक उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा के पक्ष में जो माहौल बना है, उसे बनाए रखने के लिए एक आक्रामक चेहरे की जरूरत है जो अगले दो ढाई सालों तक यह खुमार उतरने न दे।

प्रदेश भाजपा के मौजूदा नेतृत्व में कोई भी ऐसा चेहरा नहीं है,जो राज्य की सपा सरकार के अल्पसंख्यक तुष्टीकरण और खराब कानून व्यवस्था पर प्रदेश की जनता में वैसा रोष पैदा कर सके जैसा कि लोकसभा चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी ने यूपीए सरकार के खिलाफ पैदा किया था।

जबकि योगी आदित्यनाथ लगातार पूर्वांचल में न सिर्फ लोकसभा का चुनाव जीत रहे हैं, बल्कि वह उस गोरखधाम पीठ के पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी हैं, जिसकी मान्यता पूरे देश में है और महंत अवैद्यनाथ राम मंदिर आंदोलन के एक प्रमुख अगुआ संत रहे हैं।
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2002 से सत्ता से बाहर है भाजपा

यह अकेली पीठ जिसके पीठाधीश्वर राजपूत होते हैं। देश के हर बड़े राजपूत नेता यहां श्रद्धा से शीश नवाते रहे हैं। बताया जाता है कि योगी आदित्यनाथ का नाम पहले राजनाथ सिंह ने केंद्रीय मंत्री बनाने के लिए प्रस्तावित किया था।

लेकिन संघ नेतृत्व ने यह कहकर कि योगी को उत्तर प्रदेश में बड़ी भूमिका सौंपी जाएगी उन्हें सरकार से बाहर ही रखा। उत्तर प्रदेश में भाजपा 2002 से ही सत्ता से बाहर है।

उसके बाद से पार्टी अपने सभी प्रदेश नेताओं पर दांव लगा चुकी है, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। इसलिए अब संघ ने योगी आदित्यनाथ को भाजपा का चेहरा बनाने का मन बनाया है।
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