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सदाशिवम को राज्यपाल बनाए जाने पर बवाल

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शीला दीक्षित की जगह पद संभालने को केंद्र ने राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजी है। जिसकी आज राष्ट्रपति औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।
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केंद्र सरकार ने भारत के पूर्व चीफ जस्टिस पी सदाशिवम के नाम की सिफारिश केरल के राज्यपाल के रूप में की है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने शीला दीक्षित की जगह पद संभालने के लिए सदाशिवम का नाम राष्ट्रपति भवन भेज दिया है।

माना जा रहा है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे से वापस लौटने के बाद मंगलवार को इस संबंध में औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
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हालांकि केंद्र सरकार के इस कदम से कानूनी व राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद से रिटायर हुए व्यक्ति को इस तरह की जिम्मेदारी सौंपना सही है या नहीं।

न सिर्फ कांग्रेस ने बल्कि ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने भी इस कदम का कड़ा विरोध किया है। याद रहे कि जस्टिस सदाशिवम रिटायर होने से पहले जुलाई, 2013 से अप्रैल, 2014 तक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पद पर कार्यरत थे।

सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उन्होंने कई अहम फैसले लिए, जिसमें से रिलायंस गैस विवाद भी एक है। इसके अलावा उन्होंने न्यायिक पदों पर नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली का भी समर्थन किया था।

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कांग्रेस कर रही है विरोध

पूर्व जस्टिस के नाम की सिफारिश का जबर्दस्त विरोध भी शुरु हो गया है। बार एसोसिएशन और कांग्रेस इस कदम का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा, ‘बेहतर होगा कि फिलहाल इस संवेदनशील मुद्दे पर मैं कुछ न कहूं क्योंकि अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

मैं बस सिर्फ इतना कह सकता हूं कि भारत के चीफ जस्टिस जैसे सर्वोच्च स्थान पर आसीन होने के बाद इस तरह का पद पर नियुक्ति खेदजनक है। यह दोनों पक्षों के लिए ही सही नहीं है।’

उधर, केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अभी तक इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी है। जबकि ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के चेयरमैन आदिश सी अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार हमेशा ही न्यायिक स्वतंत्रता की बात करती है और इस कदम से निश्चित तौर पर न्यायिक स्वतंत्रता को धक्का पहुंचेगा।
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