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नाराजगी की खबर पर मोदी के मंत्री ने दी सफाई

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केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर उनकी नाराजगी की अटकलें कोरी अफवाह है।
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उन्होंने कहा है कि कांग्रेस शासित कुछ राज्य भी यूपीए सरकार के समय बने भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की मांग कर रहे थे। अध्यादेश के जरिये लागू कानून में पांच सेक्टरों में जमीन मालिकों की रजामंदी का प्रावधान हटा दिया गया है। यानी इन सेक्टरों में अधिग्रहण के लिए जमीन मालिकों की रजामंदी की जरूरत नहीं होगी।

बीरेंद्र सिंह ने दावा किया कि यूपीए की ओर से लाए गए कानून में 60 त्रुटियां थीं। इन्हें अध्यादेश के जरिये लाए गए कानून में ठीक कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार में राहुल गांधी को खुश करने के लिए जल्दबाजी में भूमि अधिग्रहण विधेयक पारित कराया गया था। उनकी गलतियों की सजा हम भुगत रहे हैं।
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'नए कानून में किसानों के हितों को पूरा ध्यान'

अध्यादेश का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश में किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। नए अध्यादेश में किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे, राहत और पुनर्वास संबंधित कोई भी प्रावधान नहीं हटाया गया है।

उनसे जब पूछा गया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को स्पष्टीकरण के दौरान वह तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ मौजूद क्यों नहीं थे तो उन्होंने बात को टालते हुए कहा कि मुझे बुलाया गया था लेकिन मुझसे उन लोगों का संपर्क नहीं हो सका।

दरअसल मीडिया में इस तरह की खबरें थीं कि चौधरी बीरेंद्र सिंह यूपीए द्वारा बनाए गए भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों को मौजूदा अध्यादेश के जरिये हल्का करने से नाराज थे।

लेकिन उन्होंने कहा कि अगर मैं नाराज होता तो अब तक कैबिनेट में नहीं होता। मैंने जो भी किया है उसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि किसानों के हितों की रक्षा हो।
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